1. मिल्खा सिंह
जो हार को भी जीत कर दे मैं जानता हूं, उस सरदार को ।
उठ जा जागता है, बस जीतने की चाह में,
जो भागता नहीं उड़ता है, आसमान में,
देखा है, हमने उसको जीतते संसार को,
जो हार को भी जीत कर दे मैं जानता हूं, उस सरदार को ।
करले हर जीत अपनी, अगर एक बार कह दे,
हर दौड़ में जिसने इतिहास बदले,
मैं सर झुका कर नमन करता हूं, उसके विश्वास को,
जो हार को भी जीत कर दे मैं जानता हूं, उस सरदार को।
उसके पैरों से वो बहता खून देखा है मैंने,
दर्द में भी भागते उसको देखा है मैंने,
देखा है मैंने उसकी ऊंची उड़ान को,
जो हार को भी जीत कर दे मैं जानता हूं, उस सरदार को ।
कोयले से निकल कॉल को हराया जिसने,
संसार पर विजय कर अपना लोहा मनाया जिसने,
मैं गुरु मानता हूं मिल्खा सिंह को,
जो हार को भी जीत कर दे मैं जानता हूं, उस सरदार को ।
