हिन्दी कविताएँ : सूर्य प्रकाश शर्मा

Hindi Poetry : Surya Prakash Sharma


नया साल

है नया साल पर, इस नए साल पर। कुछ नया तो नहीं, कुछ नया तो नहीं। है नया साल पर, इस नए साल पर। सुख मिला तो नहीं, दुःख गया तो नहीं।। ज़िन्दगी है हमारी पुरानी-सी ही, इसमें रंगत कोई-सी नई भी नहीं। आई सुख की सुहानी किरण भी नहीं। सर्द रातें तो दुःख की गई भी नहीं । गुज़री है रात तो, पर हमें अब तलक, नव सुबह का संदेशा मिला तो नहीं । है नया साल पर, इस नए साल पर। कुछ नया तो नहीं, कुछ नया तो नहीं। वो ही पत्तों से गिरती हुई ओस है, जिसको पीकर के सूरज भी मदहोश है। धूम्र है, है कुहासा, औ' सन्नाटा है, प्रकृति को ना जाने क्या अफ़सोस है! आज की शाम ने, देवता काम ने, साज अपनी प्रिया का किया तो नहीं । है नया साल पर, इस नए साल पर। कुछ नया तो नहीं, कुछ नया तो नहीं। है नया साल पर, इस नए साल पर। सुख मिला तो नहीं, दुःख गया तो नहीं।।

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