हिंदी कविताएँ : सरिता सिंह

Hindi Poetry : Sarita Singh


सिस्टम करे गुमान है

सिस्टम करे गुमान है, कुर्सी में ही जान है l जो बोले सच की बोली कहते सभी नादान है। सड़क गली सुनसान हैं, नदियों में तूफान है। अन्तर्मन में लालच बैठा, सबको प्यारी जान है। वादों में जुमलेबाज़ी, होठों पर अरमान है। जेब भरी तो बल्ले बल्ले, वरना बस अपमान है। रूठी हुई मचान है टूटा हुआ मकान है। खाने को रोटी नहीं जीवन भी हलकान है सत्ता का फरमान है। जरूरी बस मतदान है पूरे हुए नहीं वादे जनता का नुकसान है।

नेवले और साँप की यारी चल रही है

नेवले और साँप की यारी चल रही है, बड़ी साजिश की तैयारी चल रही है। जाति-धर्म के नाम पे सौदेबाज़ी, कुर्सी की मारामारी चल रही है। कल जो कहते थे हम दोस्त हैं तुम्हारे दोस्तो के दिलो पर आरी चल रही है गठबंधन का गणित बड़ा उलझा हुआ है, कभी इधर , कभी उधर सवारी चल रही है। जनता देती है वोट खोखले वादों पर, नेताओं की झूठ मक्कारी चल रही है। सत्ता की कुर्सी ही लक्ष्य बन गई अब, संविधान पर बहस उधारी चल रही है। सरिता बरसों का इतिहास उठाकर देखो, सिर्फ सत्ता की ही खरीदारी चल रही है।

हिंदी पर गीत

कोई मुझसे पूछे की हिंदी भाषा क्या है । हिंद की बेटी भाषाओं की अग्रजा है। वर्ण शब्द अक्षर से युक्त गागर में सागर है पावन, दिव्य तो इसका हर एक आखर है हिमालय के मस्तक पर फहरती ध्वजा है। कोई मुझसे पूछे कि हिंदी भाषा क्या है । .....हिंद की बेटी भाषाओं की अग्रजा है। रैदास सूर कबीर तुलसी नानक का वंदन है सम्पूर्ण साहित्य इसके माथे का चंदन है गुरुओं की वाणी , भाषा ज्ञान की साधना है। कोई मुझसे पूछे कि हिंदी भाषा क्या है । ....हिंद की बेटी भाषाओं की अग्रजा है। सभ्यता सिखाती हिंदी बनाती महान है सीधी सरल है लिपि ,करती भाषा को धनवान है शब्दों की शक्ति अभिधा लक्षणा एवं व्यंजना है। कोई मुझसे पूछे कि हिंदी भाषा क्या है ......हिंद की बेटी भाषाओं की अग्रजा है। मुरली की तान परम गीता का ज्ञान है समाहित इसमें मीरा का प्रेम उनवान है पढ़ने में, लिखने में यह बहुत ही आसान है। कोई मुझसे पूछे कि हिंदी भाषा क्या है .... हिंद की बेटी भाषाओं की अग्रजा है।