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हिन्दी कविताएँ : अक्षय भंडारी

Hindi Poetry : Akshay Bhandari


लालच के साये

दूरभाष यंत्र अब आधुनिक हो गए सब अब इस यंत्र में मंत्रमुग्ध हो गए जो वरदान बन गए, वो अभिशाप हो गए हर प्रहर में देखो कैसे सफर हो गए भूतकाल में जो दूर थे आज यंत्र में सक्रिय हो गए वर्तमान में लालच की माया में किशोर भावविभोर हो गए आधुनिक यंत्र में जब सक्रिय खेल हो गए भूतकाल में अच्छे दिन थे आज लालच के साये हो गए।

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