अदम गोंडवी Adam Gondvi
अदम गोंडवी की रचनाएँ
धरती की सतह पर - अदम गोंडवी
- 'अदम' सुकून में जब कायनात होती है
- आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे
- उनका दावा, मुफ़लिसी का मोर्चा सर हो गया
- एशियाई हुस्न की तस्वीर है मेरी ग़ज़ल
- कब तक सहेंगे ज़ुल्म रफ़ीक़ो-रक़ीब के
- काजू भुने पलेट में, विस्की गिलास में
- ग़ज़ल को ले चलो अब गाँव के दिलकश नज़ारों में
- घर में ठण्डे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है
- चाँद है ज़ेरे-क़दम, सूरज खिलौना हो गया
- जितने हरामख़ोर थे कुर्बो-जवार में
- जिसके सम्मोहन में पाग़ल, धरती है, आकाश भी है
- जिस तरफ डालो नजर सैलाब का संत्रास है
- जिस्म की भूख कहें या हवस का ज्वार कहें
- जिस्म क्या है, रुह तक सब कुछ खुलासा देखिए
- जुल्फ अंगडाई तबस्सुम चाँद आईना गुलाब
- जो उलझ कर रह गई फाइलों के जाल में
- जो 'डलहौजी' न कर पाया वो ये हुक्काम कर देंगे
- टी०वी० से अख़बार तक ग़र सेक्स की बौछार हो
- तुम्हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है
- न महलों की बुलंदी से न लफ़्ज़ों के नगीने से
- नीलोफर सबनम नहीं अंगार की बातें करो
- पहले जनाब कोई शिगूफ़ा उछाल दो
- बज़ाहिर प्यार को दुनिया में जो नाकाम होता है
- बेचता यूँ ही नहीं है आदमी ईमान को
- भुखमरी की ज़द में है या दार के साये में है
- भुखमरी, बेरोज़गारी, तस्करी के एहतिमाम
- भूख के एहसास को शेरो-सुख़न तक ले चलो
- महज़ तनख़्वाह से निपटेंगे क्या नखरे लुगाइ के
- महल से झोंपड़ी तक एकदम घुटती उदासी है
- मानवता का दर्द लिखेंगे, माटी की बू-बास लिखेंगे
- मुक्तिकामी चेतना, अभ्यर्थना इतिहास की
- मैं चमारों की गली में ले चलूंगा आपको
- ये अमीरों से हमारी फ़ैसलाकुन जंग थी
- ये दुखड़ा रो रहे थे आज पंडित जी शिवाले में
- ये समझते हैं, खिले हैं तो फिर बिखरना है
- ये महाभारत है जिसके पात्र सारे आ गए
- विकट बाढ़ की करुण कहानी नदियों का संन्यास लिखा है
- वेद में जिनका हवाला हाशिए पर भी नहीं
- वो जिसके हाथ में छाले हैं, पैरों में बिवाई है
- सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद है
- हीरामन बेज़ार है उफ़्! किस कदर महँगाई से
समय से मुठभेड़ - अदम गोंडवी
- आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे
- काजू भुने पलेट में, विस्की गिलास में
- किसको उम्मीद थी जब रौशनी जवां होगी
- ग़ज़ल को ले चलो अब गाँव के दिलकश नज़ारों में
- घर में ठण्डे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है
- जिस्म क्या है, रुह तक सब कुछ खुलासा देखिए
- जो उलझ कर रह गई फाइलों के जाल में
- जो 'डलहौजी' न कर पाया वो ये हुक्काम कर देंगे
- बज़ाहिर प्यार को दुनिया में जो नाकाम होता है
- बेचता यूँ ही नहीं है आदमी ईमान को
- भुखमरी की ज़द में है या दार के साये में है
- भूख के एहसास को शेरो-सुख़न तक ले चलो
- मैंने अदब से हाथ उठाया सलाम को
- ये अमीरों से हमारी फ़ैसलाकुन जंग थी
- वह सिपाही थे न सौदागर थे न मजदूर थे
