ग़ुब्बार-ए-अय्याम : फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
Ghubar-e-Ayyam in Hindi Faiz Ahmed Faiz
- दरबार में अब सत्वते-शाही की अलामत
- हम मुसाफ़िर यूँ ही मसरूफ़े सफ़र जाएँगे
- जैसे हम-बज़्म हैं फिर यारे-तरहदार से हम
- फिर आईना-ए-आलम शायद कि निखर जाये
- फूल मस्ले गये फ़र्शे-गुलज़ार पर
- तुम ही कहो क्या करना है
- इश्क अपने मुजरिमों को पा-ब-जौलां ले चला
- मेजर इसहाक की याद में
- एक नग़मा करबला-ए-बेरूत के लिये
- एक तराना मुजाहदीने-फ़लिस्तीन के लिये
- ख़्वाब बसेरा
- हिजर की राख और विसाल के फूल
- ये किस दयार-ए-अदम में
- नज़र-ए-हसरत मोहानी
- जो मेरा तुम्हारा रिश्ता है
- आज शब कोई नहीं है
- इधर न देखो
- शाम-ए-ग़ुरबत
- तराना-2 (हम देखेंगे)
