गीत-अगीत गोपालदास नीरज
Geet-Ageet Gopal Das Neeraj
- गीत-विश्व चाहे या न चाहे
- सारा जग बंजारा होता
- मैं पीड़ा का राजकुँवर हूँ
- सारा जग मधुबन लगता है
- उनकी याद हमें आती है
- खिड़की बन्द कर दो
- अब सहा जाता नहीं
- तुम ही नहीं मिले जीवन में
- बिन धागे की सुई ज़िन्दगी
- जीवन नहीं मरा करता
- सारा बाग़ नज़र आता है
- रीती गागर का क्या होगा
- मात्र परछाईं हूँ
- खिड़की खुली
- मोती हूँ मैं
- द्वैताद्वैत
- पायदान
- हरिण और मृगजल
- धनी और निर्धन
- बेशरम समय शरमा ही जाएगा
Geet-Ageet Gopal Das Neeraj
- गीत-विश्व चाहे या न चाहे
- सारा जग बंजारा होता
- मैं पीड़ा का राजकुँवर हूँ
- सारा जग मधुबन लगता है
- उनकी याद हमें आती है
- खिड़की बन्द कर दो
- अब सहा जाता नहीं
- तुम ही नहीं मिले जीवन में
- बिन धागे की सुई ज़िन्दगी
- जीवन नहीं मरा करता
- सारा बाग़ नज़र आता है
- रीती गागर का क्या होगा
- मात्र परछाईं हूँ
- खिड़की खुली
- मोती हूँ मैं
- द्वैताद्वैत
- पायदान
- हरिण और मृगजल
- धनी और निर्धन
- बेशरम समय शरमा ही जाएगा
