गौरेयाँ-जुगिया : बुन्देली लोकगीत
Gaureyan-Jugiya : Bundeli Lok Geet
आइयो बैना आइयो बाई आज
आइयो बैना आइयो बाई आज हमारें गौरेयाँ चली चली कुम्हरा कें गई ती माटी की सेज बनाओ दैया। आज हमारें ... चली चली मालिन कें गई ती फूलन कौ सेहरा बनाओ दैया। आज... चली चली गंधी कें गई ती सुरमा नोनो बनाओ दैया। आ हमारे... चली चली दुर्जिन कें गई ती लंहगा लुँगरो बनाओ दैया। आज... चली चली सुनरा कें गई ती बेंदी जड़ाउ बनाओ दैया। आज... आइयो बैना आइयो बाई आज हमारे गौरैयाँ।
पैली परसा आई पातर
पैली परसा आई पातर, पातर देख हो गई आतर। दूजी परसा आई दौना, दौना देख हो गई मौना। तीजी परसा आई भात, भात देख कें जल गऔं गात। चौथी परसा आई दार, दार देख मचा दई रार। पाँचई परसा आई कढ़ी, कढ़ी देख मगरे चढ़ी। छठई परसा आई माड़े, माड़े देख हो गई लाड़े। सातई परसा आई घीउ, घीउ देख भर गऔ जीउ। आठई परसा आई बूरो, बूरो देख गई घूरो। नौवीं परसा आई पापड़, पापड़ देख हो गई खापड़।
ता थैया ता थैया थोरे दिनन की
ता थैया ता थैया थोरे दिनन की ता थैया। पंडित की बेटी अपने बाप से कहै पोथी पै बेटी कैसे रहे। बनिया की बेटी अपने बाप से कहै, तखरी पै बेटी कैसे रहे। ता थैया... कुम्हार की बेटी अपने बाप से कहै, चुका पै बेटी कैसे रहे। ता थैया... बढ़ई की बेटी अपने बाप से कहै, बसूला पै बेटी कैसे रहे। ता थैया... ढीमर के बेटी अपने बाप से कहै काँवर पै बेटी केसे रहे। ता थैया...
अरे जीजा बर जाये तौरौ होरा
अरे जीजा बर जाये तौरौ होरा। मेरी बाँड़ बर गई रे। काँ गई तीं चना भाजी लैवे काँ गई ती। रामकली ने कयीती सो लखन समधी के खेत गई ती। सो होरा मोरा कछु नई मिले मोरी बाँड़ बर गई। अरे जीजा बर जायें तोरौ होरा मोरी बाँड़ बर गई।