दस्ते-तहे-संग : फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
Dast-e-Tah-e-Sung in Hindi Faiz Ahmed Faiz
- आज यूं मौज-दर-मौज ग़म थम गया
- बेदम हुए बीमार दवा क्यों नही देते
- हर सम्त परीशाँ तेरी आमद के क़रीने
- जमेगी कैसे बिसाते-याराँ कि शीशा-ओ-जाम बुझ गये हैं
- कब ठहरेगा दर्द-ए-दिल, कब रात बसर होगी
- न गवाँओ नावके-नीमकश दिले-रेज़ा-रेज़ा गवां दिया
- शरहे-फ़िराक, मदहे-लबे-मुशकबू करें
- तेरे ग़म को जाँ की तलाश थी तेरे जाँ-निसार चले गए
- यक-ब-यक शोरिशे-फुगाँ की तरह
- ये जफ़ा-ए-ग़म का चारा, वो नजाते-दिल का आलम
- सरे-आग़ाज़
- दस्ते-तहे-संग आमदः
- सफ़रनामा
- जश्न का दिन
- शाम
- तुम ये कहते हो अब कोई चारा नहीं
- शोरिशे-ज़ंजीर बिस्मिल्लाह
- आज बाज़ार में पा-ब-जौलाँ चलो
- क़ैदे-तनहाई
- दो मर्सिए
- कहाँ जाओगे
- शह्रे-याराँ
- खुशा ज़मानते-ग़म
- जब तेरी समंदर आँखों में
- रंग है दिल का मि
- पास रहो
- मंज़र
