बिरहा : मैथिली लोकगीत
Birha : Maithili Lokgeet
कथिएक पात झीलिम झारै छै
कथिएक पात झीलिम झारै छै रओ संगीतबा कि कथिएक पात लम्बी फेर कथी केर पात नाचै छौंड़ी कसबिनियां रओ कि कौने नगर भेलै शोर? पीपर के पात झीलिम झारै छै रओ संगीतबा कि बँसबा के गाछ लम्बी पोर पुरैनिक पात नाचै छौंड़ी कसबिनियां रओ कि फल्लां नगर भय गेलै शोर।
कहमामे ठनकै परेमियां
कहमामे ठनकै परेमियां अनका रओ ठनका कहमामे ठनकै कैला सांढ़ कहमामे ठनकै परेमियां धोबिन केर बेटिया रओ कहमामे उठै घमसान? मेघबामे ठनकै परेमियां अनका रओ ठनका कि गाइ-जेड़मे ठनकै कैला सांढ़ घाट पर ठनकै परेमियां धोबिन केर बेटिया रओ पलंगा पर उठै घमसान।
कहमा सऽ एलै संगीतबा बर रे बरिअतिया
कहमा सऽ एलै संगीतबा बर रे बरिअतिया रओ कीये छिऐ बरबा के नाम कहमा मे जाकऽ संगीतबा मरबा बन्हेतै रओ केये ओकरा करतै कन्यादान? अवध सऽ एलै परेमियां बर रे बरिअतिया रओ बरबा के नाम छिऐ राम मिथिला मे जाकऽ परेमियां मरबा बन्हेतै जनक राजा करतै कन्यादान।
केकरा सुमरि कऽ परेमियाँ घर सँ रओ
केकरा सुमरि कऽ परेमियाँ घर सँ रओ बहार भेलै केकरा सुमरि कऽ घेलें राह केकरा सुमरि कऽ परेमियां रेलबा पर चढ़लें, रओ की केकरा सुमिर कऽ धेलेँ जहाज? माताजी के सुमरि कऽ परेमियां घर सँ रओ बहार भेलौं पिताजी सुमरि कऽ धेलहुँ राह काली माइ के सुमरि कऽ परेमियां रेलबा पर चढ़लौं, रओ को गंगा माइ सुमरि कऽ धेलौं जहाज।
केये तोरा देलकौ परेमियां सीकी कोर धोतिया
केये तोरा देलकौ परेमियां सीकी कोर धोतिया रओ केये तोरा देलकौ धेनू गाय केये तोरा देलकौ परेमियां अपना कोखिक बेटिया रओ केये तोरा देलकौ अंगुरी धराय? सार मोरा देलकै परेमियां सीकी कोर धोतिया रओ ससुर मोरा देलकै धेनू गाय सासु मोरा देलकै परेमियां अपना कोखिक बेटिया रओ सरहोजि देलकै अंगुरी रे धराय। किए तोरा देलकौ परेमियां सीकी कोर धोती रओ रओ किए तोरा देलकौ धेनू गाय किए तोरा देलकौ परेमियां अपना कोखिक बेटी रओ किए देलकौ अंगुरी धराय? पहिरै खातिर देलकै परेमियां सीकी कोर धोतिया रओ दुधबा खातिर देलकै धेनू गाय जिनगी के संगी बनाकऽ देलकै अपन बेटिया रओ तेँ रओ देलकै अंगुरी धराय।
कोन मास बिरहा जनम लेलकै रओ
कोन मास बिरहा जनम लेलकै रओ जोड़ीदार कि कोन मास भेलै छठिहार कोन महीना परेमियां डेगा-डेगी देलकै, रओ की कोन मास भेलै परचार? अगहन मास परेमियां बिरहा रओ जनम लेलकै पूस मास भेलै छठिहार माघ महिना परेमियां डेगा-डेगी देलकै, रओ की फागुन मास भेलै परचार।
कौन फूल फूले परेमियां धरती रे धरमुआं
कौन फूल फूले परेमियां धरती रे धरमुआं रओ कोन फूल फूले असमान कोन फूल फूले परेमियाँ गंगा माइ के गोदिया कि खुशी-खुशी रहै भगमान? दूभी फूल-फूले परेमियां धरती रे धरमुआं रओ तारा फूल फूले असमान कमल फूल फूले परेमियां गंगा माइ के गोदिया रओ खुशी-खुशी रहै भगमान।
रामजोड़ी रे, नान्हि टा टा छौंड़ी
रामजोड़ी रे, नान्हि टा टा छौंड़ी सब जाइ ससुरिया रओ घुरि-घुरि लागै गंगा माइ के गोर मोन सऽ अशीषबा तहूँ दीहक हे गंगा मइया जाइते लड़िकबा पैदा होई।