Hindi Kavita
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
Faiz Ahmed Faiz
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ज़िन्दां-नामा फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

1.बात बस से निकल चली है
2.बिसाते-रक़्स पे साद शर्क़ो-गरब से सरे शाम
3.गर्मी-ए-शौक़े-नज़ारा का असर तो देखो
4.गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौबहार चले
5.हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है
6.कब याद में तेरा साथ नहीं, कब हात में तेरा हात नहीं
7.कुछ मुहतसिबों की ख़ल्बत में, कुछ वाइज़ के घर जाती है
8.रहे ख़िज़ां में तलाशे-बहार करते रहे
9.सब क़त्ल होके तेरे मुक़ाबिल से आये हैं
10.शाख़ पर ख़ूने-गुल रवाँ है वही
11.शामे-फिराक़ अब न पूछ आई और आ के टल गयी
12.शैख साहब से रस्मो-राह न की
13.सितम की रस्में बहुत थीं लेकिन, न थी तेरी अंजुमन से पहले
14.सुबह की आज जो रंगत है वो पहले तो न थी
15.तिरी उमीद, तिरा इंतज़ार जब से है
16.यूँ बहार आई है इस बार कि जैसे क़ासिद
17.ऐ हबीबे-अम्बरदस्त
18.मुलाक़ात
19.वासोख़्त-सच है, हमीं को आपके शिकवे बजा न थे
20.ऐ रौशनियों के शहर-सब्ज़ा-सब्ज़ा सूख रही है
21.हम जो तारीक राहों में मारे गए
22.दरीचा-गड़ी हैं कितनी सलीबें मिरे दरीचे में
23.दर्द आयेगा दबे पांव
24.अफ़्रीका कम बैक
25.यह फ़स्ल उमीदों की हमदम
26.बुनियाद कुछ तो हो
27.कोई आशिक़ किसी महबूबः से
28.अगस्त १९५५-शहर में चाक-गरेबाँ हुए नापैद अबके
 
 
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