Hindi Kavita
गोपालदास नीरज
Gopal Das Neeraj
 Hindi Kavita 

वंशीवट सूना है गोपालदास नीरज

किसके लिए ?
आँसू जब सम्मानित होंगे
अपनी बानी प्रेम की बानी
ठाठ है फ़क़ीरी अपना
यह प्यासों की प्रेम सभा है
बिन खेवक की नैया
ओरे मन !
कुछ और दीखे ना
अब नहीं
ओ हर सुबह जगाने वाले
डाल अमलतास की
कारवां गुज़र गया
मेरे हिमालय के पासबानो
जवानी है क़लम मेरी
उतरा है रंग बहारों का
रचना आपात काल की
 
 
 Hindi Kavita