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गोपालदास नीरज
Gopal Das Neeraj
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वंशीवट सूना है गोपालदास नीरज

किसके लिए ?
आँसू जब सम्मानित होंगे
अपनी बानी प्रेम की बानी
प्यार की कहानी चाहिए
भाव-नगर से अर्थ-नगर में
ठाठ है फ़क़ीरी अपना
चल औघट घाट प यार ज़रा
यह प्यासों की प्रेम सभा है
बिन खेवक की नैया
सोनतरी अभी कहाँ आई
मैंने वह अँगूठी उतार दी
सबसे ग़रीब इन्सान
ओरे मन !
कुछ और दीखे ना
अब नहीं
ओ हर सुबह जगाने वाले
डाल अमलतास की
कारवां गुज़र गया
मेरे हिमालय के पासबानो
जवानी है क़लम मेरी
उतरा है रंग बहारों का
रचना आपात काल की
 
 
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