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डा. दीवान सिंह कालेपानी
Dr. Diwan Singh Kalepani
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वगदे पानी डा. दीवान सिंह कालेपानी

उह किथे
इसत्री नूं
इह कहानी नहीं
इक कोई
ईसा नूं
सभ मेरे साथी
शामां पै गईआं
हनेरी
कलन्दर दा बांदर
काली
कीह हो जांदा
कैदी
कोहलू
चिड़ी
जने नूं
जवानी मेरी
जीवन-कटोरा
जीवन-मेला
ज़िन्दगी
टोट
तप-तपस्स्या
तिलक तिलक पई पैनी आं
दुक्ख-दारू
दो नंगियां रूहां
नन्ही जिन्दड़ी मेरी
नवां मज़हब
पटे बिनां कुत्ता
पटे वाला कुत्ता
परेशानी
पुकार मेरे रब्ब दी
पूरणता
फ़कीर दी सदा
फ़रेब
बसंत उहले कौन कोई
बाज़ीगर नूं
बाबा अटल्ल
भगत नूं
भुक्खा
मरन पिच्छों
मुहाने नूं
मेरा चन्न
मेरे सुफने
मैं
मैं इकल्ला नहीं
मैं सुंञी
मैं कैद
मैंडा साथी
रब्ब
रब्ब मेरा राखा
राही
वगदे पानी
 
 
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