Hindi Kavita
हरिवंशराय बच्चन
Harivansh Rai Bachchan
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त्रिभंगिमा हरिवंशराय बच्चन

पगला मल्लाह
गंगा की लहर
सोन मछरी
लाठी और बाँसुरी
खोई गुजरिया
नील परी
महुआ के नीचे
आंगन का बिरवा
फिर चुनौती
मिट्टी से हाथ लगाये रह
तुम्हारी नाट्यशाला
गीत शेष
रात-राह-प्रीति-पीर
जाल समेटा
जब नदी मर गई-जब नदी जी उठी
टूटे सपने
चेतावनी
ताजमहल
यह भी देखा:वह भी देखा
दानवों का शाप
 
 
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