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तारिक़ अज़ीम तनहा

मौ. तारिक़ अज़ीम गौर ( 10 फरवरी,1996-) को तारिक़ अज़ीम 'तनहा' के नाम से भी जाना जाता है। इनका जन्म गांव बन्हेड़ा टांडा जो कि रुड़की के अत्यंत समीप है वहां हुआ। इनके पिता किसान हैं। 'तनहा' की प्रारंभिक शिक्षा गाँव के छोटे से विद्यालय में हुई। दसवी, कक्षा में आते-आते ये शे'र कहने लगे । इनको शुरू से ही मिर्ज़ा ग़ालिब और इक़बाल के शे'रों और ग़ज़लों ने बहुत प्रभावित किया है । अब 'तनहा' उत्तराखंड प्रदेश के सरकारी कॉलेज, जी.बी.पंत इंजीनियरिंग कॉलेज, पौड़ी गढ़वाल में तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। ये अपनी पुस्तक 'दास्तान-ए-तनहा' पर काम कर रहे हैं ।

तारिक़ अज़ीम 'तनहा' की शायरी

इन रिन्दों की खुशफहमी को हवा दे दे
हुकूमते-तीरगी ना आई ना आयेगी
पहाड़ों से कूच कर जाने को जी चाहता है
जिंदगी को गर बसर करना है
बादशाह ओ औलिया को ढूंढता हूँ मैं
अश्आर
 
 
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