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Hindi Poetry Shiv Pratap Singh

हिंदी कविता शिव प्रताप सिंह

1. राष्ट्र प्रेम

झेल लो तूफ़ान तोपों का मुहाना मोड़ दो,
देश के इतिहास में ऐसे इबारत जोड़ दो.
ऐ हिमालय की हवाओं कह दो पाकिस्तान से,
ले कभी सकता नही तू लोहा हिंदुस्तान से.
हर पत्थर भगवान हर शिखर मंदिर हमारा,
ह्रदय प्रान में बसा है देश का कण कण हमारा,
मत खेल बारुदी हवा से ख़ाक तू हो जायेगा
ख़ाक ही छानेगा हर दम खाक में मिल जायेगा.
कुचलने को हैं खड़े हम पाक का नपाक फ़न,
कसम खाते है तिरंगे की मेरे प्यारे वतन
गोलियां हम झेल लेंगे अपना सीना तान कर,
जान भी कुर्बान होगी राष्ट्र के सम्मान पर
जय हिंद जय भारत

2. तुम्हारी आँखें कितनी प्यारी हैं

तुम्हारी आँखें कितनी प्यारी हैं,
जिसे देखती है अपनाती हैं,
कभी रुलाती है कभी हंसाती हैं,
तुम्हारी आँखें गजब ढाती हैं,
तुम्हारी आँखों में बस जाऊं मै
मोती बनकर दामन में बिखर जाऊं मैं,
मुझे मरना है तुम्हारे आगोश में
कितना कुछ कहती हैं तुम्हारी आँखें,
मैं सुनता हूँ अक्सर अपनी आँखों से,
कितना कुछ बोलती हैं तुम्हारी आँखें,
मुझे अपना लो कहती हैं हमारी आँखें

 
 
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