Hindi Kavita
अज्ञेय
Agyeya
 Hindi Kavita 

Sharanarthi Agyeya

शरणार्थी अज्ञेय

मानव की आँख
पक गई खेती
ठाँव नहीं
मिरगी पड़ी
रुकेंगे तो मरेंगे
समानांतर साँप
गाड़ी रुक गई
हमारा रक्त
श्री मद्धर्मधुरंधर पंडा
कहती है पत्रिका
जीना है बन सीने का साँप
 
 
 Hindi Kavita