Hindi Kavita
बाबा शेख फ़रीद
Baba Sheikh Farid
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Shabad Baba Sheikh Farid

1. आसा सेख फरीद जीउ की बाणी
ੴ सतिगुर प्रसादि

दिलहु मुहबति जिंन्ह सेई सचिआ ॥
जिन्ह मनि होरु मुखि होरु सि कांढे कचिआ ॥१॥
रते इसक खुदाइ रंगि दीदार के ॥
विसरिआ जिन्ह नामु ते भुइ भारु थीए ॥१॥ रहाउ ॥
आपि लीए लड़ि लाइ दरि दरवेस से ॥
तिन धंनु जणेदी माउ आए सफलु से ॥२॥
परवदगार अपार अगम बेअंत तू ॥
जिना पछाता सचु चुमा पैर मूं ॥३॥
तेरी पनह खुदाइ तू बखसंदगी ॥
सेख फरीदै खैरु दीजै बंदगी ॥४॥१॥488॥

2. आसा

बोलै सेख फरीदु पिआरे अलह लगे ॥
इहु तनु होसी खाक निमाणी गोर घरे ॥१॥
आजु मिलावा सेख फरीद टाकिम कूंजड़ीआ मनहु मचिंदड़ीआ ॥१॥ रहाउ ॥
जे जाणा मरि जाईऐ घुमि न आईऐ ॥
झूठी दुनीआ लगि न आपु वञाईऐ ॥२॥
बोलीऐ सचु धरमु झूठु न बोलीऐ ॥
जो गुरु दसै वाट मुरीदा जोलीऐ ॥३॥
छैल लंघंदे पारि गोरी मनु धीरिआ ॥
कंचन वंने पासे कलवति चीरिआ ॥४॥
सेख हैयाती जगि न कोई थिरु रहिआ ॥
जिसु आसणि हम बैठे केते बैसि गइआ ॥५॥
कतिक कूंजां चेति डउ सावणि बिजुलीआं ॥
सीआले सोहंदीआं पिर गलि बाहड़ीआं ॥६॥
चले चलणहार विचारा लेइ मनो ॥
गंढेदिआं छिअ माह तुड़ंदिआ हिकु खिनो ॥७॥
जिमी पुछै असमान फरीदा खेवट किंनि गए ॥
जालण गोरां नालि उलामे जीअ सहे ॥८॥२॥488॥

3. ੴ सतिगुर प्रसादि
रागु सूही बाणी सेख फरीद जी की

तपि तपि लुहि लुहि हाथ मरोरउ ॥
बावलि होई सो सहु लोरउ ॥
तै सहि मन महि कीआ रोसु ॥
मुझु अवगन सह नाही दोसु ॥१॥
तै साहिब की मै सार न जानी ॥
जोबनु खोइ पाछै पछुतानी ॥१॥ रहाउ ॥
काली कोइल तू कित गुन काली ॥
अपने प्रीतम के हउ बिरहै जाली ॥
पिरहि बिहून कतहि सुखु पाए ॥
जा होइ क्रिपालु ता प्रभू मिलाए ॥२॥
विधण खूही मुंध इकेली ॥
ना को साथी ना को बेली ॥
करि किरपा प्रभि साधसंगि मेली ॥
जा फिरि देखा ता मेरा अलहु बेली ॥३॥
वाट हमारी खरी उडीणी ॥
खंनिअहु तिखी बहुतु पिईणी ॥
उसु ऊपरि है मारगु मेरा ॥
सेख फरीदा पंथु सम्हारि सवेरा ॥४॥१॥794॥

4. सूही ललित

बेड़ा बंधि न सकिओ बंधन की वेला ॥
भरि सरवरु जब ऊछलै तब तरणु दुहेला ॥१॥
हथु न लाइ कसु्मभड़ै जलि जासी ढोला ॥१॥ रहाउ ॥
इक आपीन्है पतली सह केरे बोला ॥
दुधा थणी न आवई फिरि होइ न मेला ॥२॥
कहै फरीदु सहेलीहो सहु अलाएसी ॥
हंसु चलसी डुमणा अहि तनु ढेरी थीसी ॥३॥२॥74॥

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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