Hindi Kavita
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
Faiz Ahmed Faiz
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शामे-श्हरे-यारां फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

1.आपकी याद आती रही रात-भर
2.अबके बरस दस्तूरे-सितम में क्या-क्या बाब ईज़ाद हुए
3.ग़म-ब-दिल, शुक्र-ब-लब, मस्तो-ग़ज़लख़्वाँ चलिए
4.हैरां है जबीं आज किधर सजदा रवां है
5.हमीं से अपनी नवा हमकलाम होती रही
6.हमने सब शे’र में सँवारे थे
7.हसरते दीद में गुज़राँ है ज़माने कब से
8.किस शह्‍र न शोहरा हुआ नादानी-ए-दिल का
9.कुछ पहले इन आँखों आगे क्या-क्या न नज़ारा गुज़रे था
10.न अब रकीब न नासेह न ग़मगुसार कोई
11.नासेहम गुफ़त बजुज़ ग़म चे हुनर दारद इश्क
12.सभी कुछ है तेरा दिया हुआ, सभी राहतें सभी कुलफतें
13.सहल यूं राहे-ज़िन्दगी की है
14.सितम सिखलाएगा रस्मे-वफ़ा ऐसे नहीं होता
15.तुझे पुकारा है बेइरादा
16.वो बुतों ने डाले हैं वस्वसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा गया
17.याद का फिर कोई दरवाज़ा खुला आख़िरे-शब
18.यह मौसमे-गुल गर चे तरबख़ेज़ बहुत है
19.य' किस ख़लिश ने फिर इस दिल में आशियाना किया
20.उमीदे-सहर की बात सुनो
21.जिस रोज़ क़ज़ा आएगी
22.अश्क आबाद की इक शाम
23.मेरे दर्द को जो ज़बाँ मिले
24.पाँवों से लहू को धो डालो
25.सज्जाद ज़हीर के नाम
26.ऐ शाम मेहरबां हो
27.गीत-चलो फिर से मुस्कुराएं
28.हम तो मज़बूर थे इस दिल से कि जिसमें हर दम
29.ढाका से वापसी पर
30.बहार आई
31.तुम अपनी करनी कर गुज़रो
32.मोरी अरज सुनो
33.लेनिनगराड का गोरिसतान
34.कुछ इश्क किया कुछ काम किया
35.दर-ए-उमीद के दरयूज़ाग
36.आज इक हरफ़ को फिर
 
 
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