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भारतेंदु हरिश्चंद्र
Bharatendu Harishchandra
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Prem Madhuri Bharatendu Harishchandra

प्रेम माधुरी भारतेंदु हरिश्चंद्र

कूकै लगीं कोइलैं कदंबन पै
जिय पै जु होइ अधिकार तो बिचार कीजै
यह संग में लागियै डोलैं सदा
पहिले बहु भाँति भरोसो दयो
ऊधो जू सूधो गहो वह मारग
सखि आयो बसंत रितून को कंत
इन दुखियन को न चैन सपनेहुं मिल्यौ
 
 
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