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महादेवी वर्मा
Mahadevi Verma
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Neerja/Nirja Mahadevi Verma

नीरजा महादेवी वर्मा

आज क्यों तेरी वीणा मौन
आँसू का मोल न लूँगी मैं
उर तिमिरमय घर तिमिरमय
एक बार आओ इस पथ से
ओ पागल संसार
ओ विभावरी
कमलदल पर किरण अंकित
कैसे सँदेश प्रिय पहुँचाती
कौन तुम मेरे हृदय में
क्या नई मेरी कहानी
क्या पूजन क्या अर्चन रे
क्यों जग कहता मतवाली
घन बनूँ वर दो मुझे प्रिय
जग करुण करुण, मैं मधुर मधुर
जागो बेसुध रात नहीं यह
जाग बेसुध जाग
जाने किसकी स्मित रूम-झूम
झरते नित लोचन मेरे हों
टूट गया वह दर्पण निर्मम
तुमको क्या देखूं चिर नूतन
तुम दुख बन इस पथ से आना
तुम मुझमें प्रिय, फिर परिचय क्या
तुम सो जाओ मैं गाऊँ
तुम्हें बाँध पाती सपने में
तेरी सुधि बिन क्षण क्षण सूना
दीपक में पतंग जलता क्यों
दूर घर मैं पथ से अनजान
धीरे धीरे उतर क्षितिज से
पथ देख बिता दी रैन
प्राणपिक प्रिय-नाम रे कह
प्रिय इन नयनों का अश्रु-नीर
प्रिय गया है लौट रात
प्रिय ! जिसने दुख पाला हो
प्रिय मैं हूँ एक पहेली भी
प्रिय सुधि भूले री मैं पथ भूली
पुलक पुलक उर, सिहर सिहर तन
बताता जा रे अभिमानी
बीन भी हूँ मैं तुम्हारी रागिनी भी हूँ
मत अरुण घूँघट खोल री (घूँघट)
मधुर-मधुर मेरे दीपक जल
मधुवेला है आज
मिलन यामिनी-आ मेरी चिर मिलन-यामिनी
मुखर पिक हौले बोल
मुस्काता संकेत-भरा नभ
मेरे हँसते अधर नहीं जग की आँसू-लड़ियाँ देखो
मैं बनी मधुमास आली
मैं मतवाली इधर उधर
यह पतझर मधुवन भी हो
रुपसि तेरा घन-केश पाश
लय गीत मदिर-अप्सरि तेरा नर्तन सुन्दर
लाए कौन संदेश नए घन
विरह का जलजात जीवन
 
 
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