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गोपालदास नीरज
Gopal Das Neeraj
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नीरज की पाती गोपालदास नीरज

आज की रात तुझे आख़िरी ख़त और लिख दूँ
आज की रात बड़ी शोख बड़ी नटखट है
शाम का वक्त है ढलते हुए सूरज की किरन
आज है तेरा जनम दिन, तेरी फुलबगिया में
कानपुर के नाम
पुर्तगाल के नाम
बुझते हुए दीपकों के नाम
साँसों के मुसाफ़िर
फिरका परस्तों के नाम
 
 
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