Hindi Kavita
अज्ञेय
Agyeya
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Mahavriksha Ke Neeche Agyeya

महावृक्ष के नीचे अज्ञेय

बर्फ़ की तहों के नीचे
मथो
उत्सव पिंगला
होमोहाइडेल वर्गेसिस
चुप-चाप नदी
वसन्त आया तो है
झाँकी
संभावनाएँ
नाच
अब भी यही सच है
सीमांत पर
क्लाइस्ट की समाधि पर
ना जाने कोई भेष
सड़क के किनारे गुलाब
महावृक्ष के नीचे (पहला वाचन)
महावृक्ष के नीचे (दूसरा वाचन)
वन-मिथक
शरद विलायती
तीसरा चरण
सभी से मैं ने विदा ले ली
जाड़ों में
साल-दर-साल
शरद तो आया
नन्दा
झर गयी दुनिया
उस से
धावे
धूप-सनी छाया
देहरी
तुम तक
पिछले वसंत के फूल
हट जाओ
आतंक
क्या करोगे
बौद्धिक बुलाए गए
प्रतीक्षा गीत
जरा व्याध
 
 
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