Hindi Kavita
अज्ञेय
Agyeya
 Hindi Kavita 

Kyonki Main Usei Jaanta Hoon Agyeya

क्योंकि मैं उसे जानता हूँ अज्ञेय

आज़ादी के बीस बरस
देहरी पर
कहीं राह चलते चलते
कच्चा अनार, बच्चा बुलबुल
ध्रुपद
कहाँ से उठे प्यार की बात
बही जाती है
रात : चौंध
मोड़ पर का गीत
जिस मन्दिर में मैं गया नहीं
होते हैं क्षण
दिया हुआ, न पाया हुआ
आश्वस्ति
प्रार्थना का एक प्रकार
फिर भोर एकाएक
अस्ति की नियति
चितवन
साँझ सवेरे
अहं राष्ट्रीय संगमनी जनानाम्
आवश्यक
एक दिन
जाना अजाना
घेरे
दास व्यापारी
दिति कन्या को
तुम्हें क्या
वेध्य
प्यार
जनपथ-राजपथ
लौटते हैं जो वे प्रजापति हैं
भूत
पत्थर का घोड़ा
क्यों कि मैं
तू-फू को : बारह सौ वर्ष बाद
सपना
मैत्री
उन्होंने घर बनाये
ड्योढ़ी पर तेल
पहली बार जब शराब
तं तु देशं न पश्यामि
तो क्या
केले का पेड़
एक दिन - 2
देश की कहानी : दादी की ज़बानी
उँगलियाँ बुनती हैं
गूँजेगी आवाज़
प्रेमोपनिषद्
रात में
ओ तुम
कौन-सा सच है
औपन्यासिक
कुछ फूल : कुछ कलियाँ
 
 
 Hindi Kavita