Hindi Kavita
अज्ञेय
Agyeya
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Kitni Navon Mein Kitni Baar
Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyeya

कितनी नावों में कितनी बार
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय

भूमिका
उधार
सन्ध्या-संकल्प
प्रातः संकल्प
कितनी नावों में कितनी बार
यह इतनी बड़ी अनजानी दुनिया
निरस्त्र
जीवन
समय क्षण-भर थमा
ओ निःसंग ममेतर
ओ एक ही कली की
कि हम नहीं रहेंगे
उलाहना
पक्षधर
गति मनुष्य की
उत्तर-वासन्ती दिन
पंचमुख गुड़हल
गुल-लालः
अन्धकार में जागने वाले
गृहस्थ
जैसे जब से तारा देखा
सुनी हैं साँसें
होने का सागर
नाता-रिश्ता
युद्ध-विराम
स्मारक
महानगर: कुहरा
तुम्हें नहीं तो किसे और
हम नदी के साथ-साथ
पेरियार
फ़ोकिस में ओदिपौस
कालेमेग्दान
यात्री
स्वप्न
प्रस्थान से पहले
विदा के चौराहे पर: अनुचिन्तन
काँच के पीछे की मछलियाँ
हेमन्त का गीत
जो रचा नहीं
एक दिन चुक जाएगी ही बात
मन बहुत सोचता है
धड़कन धड़कन
जिस में मैं तिरता हूँ
सम्पराय
अंगार
 
 
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