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ख़्वाजा ग़ुलाम फ़रीद
Khwaja Ghulam Farid
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Kafian Khwaja Ghulam Farid in Hindi

काफ़ियां ख़्वाजा ग़ुलाम फ़रीद

1. आ चुणों रल यार

आ चुणों रल यार ।पीलूं पक्कियां नी वे ।
कई बगड़ियां, कई सावियां पीलियां ।कई भूरियां कई फिकड़ियां नीलियां ।
कई ऊदियां गुलनार ।कटोईआ रत्तियां नी वे ।

बार थई है रशक इरम दी ।सुक्क सड़ गई जढ़ डुक्ख ते ग़म दी ।
हर जा बाग़ बहार ।साखां चक्खियां नी वे ।

पीलूं डेल्यां दियां गुलज़ारा ।कहीं गुल टोरियां कही सर खारियां ।
कई ला बैठियां बार ।भर भर पच्छियां नी वे ।

जाल जलोटीं थई आबादी ।पल पल ख़ुशियां दम दम शादी ।
लोकी सहंस हज़ार ।कुल ने पक्खियां नी वे ।

हूरां परियां टोले टोले ।हुसन दियां हीलां बिरहों दे झोले ।
रातीं ठंडियां ठार ।गोइलीं तत्तियां नी वे ।

रखदे नाज़ हुसन परवर वे ।अथरू तेग़ ते तीर नज़र दे ।
तेज़ तिक्खे हथ्यार ।दिलियां फटियां नी वे ।

कई डेवन अन्न नाल बराबर ।कई घिन आवन डेढे कर कर ।
कई वेचन बाज़ार ।तुलियां तक्कियां नी वे ।

कई धुप्प विच्च वी चुणदियां रहन्दियां ।कई घिन छान छंवेरे बहन्दियां ।
कई चुन चुन पईआं हार ।हुट्टियां थकियां नी वे ।

एडों इशवे गमज़े नख़रे ।ओडूं यार खरायती बकरे ।
कुस्सन कान त्यार ।रांदां रस्सियां नी वे ।

पीलूं चुणदीं बोछन लीरां ।चोला वी थिया लीर कतीरां ।
गिलड़े करन पचांर ।संगियां सकियां नी वे ।

आईआं पीलूं चुनन दे सांगे ।ओड़क थईआं फरीदन वांगे ।
छोड़ आराम करार ।हकियां बकियां नी वे ।

2. आहन अलन्दर रोज़ शब

आहन अलन्दर रोज़ शब ।पहुंजी खुदी में खुद ग़रक ।
हालत न सौम (संलवांत) सलूत दी ।खवाहश न हज ज़कवात दी ।
चाहत ना ज़ात सिफात दी ।हक शान वहदत जी मरक ।

ना तलब मुलक ते माल दी ।ना गरज़ जाहव जलाल दी ।
मसती खुदाई ख्याल दी ।प्हौनीं न आदम जए ते तक ।

तूने जो दर्या नोश हन ।पुर जोश थी खामोश हन ।
इसरार दे सरपोश हन ।सामित रहन मारन न बक ।

आशक अते माशूक हिन ।साबक अते मसबूक हिन ।
खुद दुर अते सन्दूक हिन ।हर तौर विच रहन्दे ओछक ।

मसकीन अते मजलूम हिन ।महज़ून अते मग़मूम हिन ।
हर वकत कलख़ादूम हिन ।रखदे न दिल विच कई उमक ।

जो कुछ है ज़ाहर बरमला ।जानड़ां मैं किवें मा सिवां ।
मुरशद महकक्क वज वजा ।हमा ओसत दा डितरा साबक ।

एहो फिकर है एहा गाल्ह है ।एहो वजद है एहो हाल है ।
एहो ज़ौक दमदम नाल है ।एहो सच है ब्या सभ है नरक ।

बठ वहम खतरे दी अदा ।डूझा नोही है हिक खुदा ।
अन्दर ते बाहर है सदा ।मौजूद हक मौजूद हक ।

तौं बिन फकत ब्या को नहीं ।मंढूं गैर की अथ बोहीं ।
है हिक सदा अते डोहीं ।हक नाल थी हिक सट फरक ।

अपनी हकीकत गोल ।बेकूं न असलों फोल तूं ।
रख असाडा बोल तूं ।आईं न हक है महज पक ।

पीकर फरीदी जाम तूं ।थी रिन्द मसत मदास तूं ।
डेहों डोंह वधा रख गाम तूं ।वाह वाह करे सारी खलक ।

3. आ मिल अज्जकल सोहणां साईं

आ मिल अज्जकल सोहणां साईं ।ना तां मुफ़ती खून थीसाईं ।
तौं बिन मूल न सहन्दियां वाहीं ।सुन दिल नाल तां गाल्ह अखाईं ।
परभत धारां रोह घनेड़े ।जथ लांघे जथ थीवम वहीरे ।
बेशक दरदमन्दां दे देरे ।जथ थलड़ा जथ सुंजड़ियां जांहीं ।
हक पल ऐश न पायम घर विच्च ।गुज़री सारी उमर सफ़र विच्च ।
पौंदे सौ सौ पोर अन्दर विच्च ।यारब्ब यार दे देस वसाईं ।
जां डेखां झड़्ड़ मींह किन मिन कूं ।रोवां कर कर याद सज्जन कूं ।
अक्खियां बलकन मूंह डेखन कूं ।गल लांवन कूं थपकन बाहीं ।
वाट नेहारां कांग उडारां ।पंडत जोसी दे कन खावां ।
सौ पुंज हारां फालां पावां ।अउसी मैडा यार कडाहीं ।
मैं बदनां कहीं भीम भरम दा ।तूंही साहब लाज शरम दा ।
ज़ोर फ़रीद कूं तैडड़े दम दा ।लगड़ी सावल तोड़ निभाईं ।

4. आ मिल माही मैं मांदी हां

आ मिल माही मैं मांदी हां ।बे वस्स बिरहों दी बांदी हां ।
इशक अवैड़े दुशमन वेड़े ।सस्स ननाणां करिम बखेड़े ।
अमड़ी जुड़ जुड़ लावम झेड़े ।बाबली वीर न भादी हां ।
खेड़े भैड़े सख़त सताविन ।नेड़े वस्सदे मारन आवन ।
संगियां सुरतियां तुहमत लावन ।कल्हड़ी पई कुरलांदी हां ।
सेझ सड़ेंदी लम्बे लेंदी ।गाने गहने फल न पेंदी ।
तूल तलेंदी चूड़ जलेंदी ।रोंदी ते ग़म खांदी हां ।
डुक्खड़े पांवां नेंह निभावां ।तौं बिन केनूं कूक सुनावां ।
तप्पदीं खपदीं वकत वंजावां ।वल वल झोकां जांदी हां ।
मूला झोकां फेर वसेसी ।सारा रोग अन्दर दा वेसी ।
यार फ़रीद अंगन पौं पेसी ।डेसम बांह सिरांदियां ।

5. आ मिल मारू माड़रो

आ मिल मारू माड़रो ।थल विच्च करदियां धाहां ।
मारा हकलां कूकड़ियां ।कर कर लम्बड़ियां बाहां ।
भुल गईआं रसमां रीतड़ियां ।जैंह डेंह लगड़ियां पीतां ।
बट्ठ पए खवेश कबीलड़े ।पर हिक तैनूं चाहां ।
किवें जीवे जालड़े ।सुंजड़ी हीर सलेटी ।
रांझन तख़त हज़ारड़े ।सुकियां लाईआं काहां ।
मा प्यु वीर वसार्युम ।रावल डितड़म रुला ।
पावां लीरे मैलड़े ।चली चुनड़ी लाहां ।
जाही चट फ़रीद नूं ।लाययो लाड खलाययो ।
मूल न विसरम रैडरियां ।सांवल नाज़ निगाहां ।

6. आ पहुंतम जैंदी मक्के

आ पहुंतम जैंदी मक्के ।एंही शहर मुबारक बक्के ।
वाह देस अरब दियां चालीं ।खुश तरहें ख़ूब ख़सालीं ।
गईआं विस्सर वतन दियां गाल्हीं ।क्या खवेश कबीले सके ।
है लज़्ज़त वाधू वाधी ।है हर दम डोड़ी शादी ।
हर वेले तांघ ज़्यादी ।कई हारे ते कई थक्के ।
हन पत्थर सेझ फुलां दी ।है धूड़ी तूल गुलां दी ।
शब बाद सबा मन भांदी ।ता सुबह झलेंदी पक्खे ।
अमगूर हज़ार मतीरन ।ख़रबूज़े पिंड कसीरन ।
रुमान शगीर कबीरन ।चुन दाने मारूं फक्के ।
है मुलक मकद्दस नूरी ।है जन्नत हूर कसूरी ।
बिन आशक पाक हज़ूरी ।प्या कौन कदम इथै रखे ।
वंज डिठम मदीना आली ।जत्थ कोनो मकान दा वाली ।
है धरती ऐबों ख़ाली ।प्या नूर रसालत छक्के ।
क्युं विसरन यार दे देरे ।थिया अक्खियां रो रो बेरे ।
दम जैंदीं करसूं फेरे ।या लुद बहसूं आ पक्के ।
तोड़े लगदे धिके धक्के ।आख वल वल यार डूं तक्के ।
तन आग मुहबत बखे ।दिल दरदों लज़त चक्खे ।
है सख़त शदीद आज़ांरी ।करे कौन फ़रीद दी कारी ।
थए भुनले नाले जारी ।दिल सोज़ों भुज्ज भुज्ज पक्के ।

7. आपे बार मुहबत चायम ड़ी

आपे बार मुहबत चायम ड़ी ।वंज आप कूं आप अवायम ड़ी ।
सब डुक्खां सूलां दी तात मिलिम ।ग़म दरद, अन्दोह, बरात मिलिम ।
भैड़े डुक्खड़ीं मार मुंझायम ड़ी ।
सोहना होत पुन्नल छड्ड केच ग्या ।गल सोज़ फ़राक दा पेच प्या ।
जो लिख्या पल्लड़े पायम ड़ी ।
डुक्खां थल मारू आ पेश ग्या ।दिल जान जिगर तन रीश ग्या ।
तत्ती इशक अवल्लड़ा लायम ।
मुंहजा यार पुन्नल छड्ड केच रुट्ठा ।सर जुलमीं नेंह जो मीह वुट्ठा ।
रब्ब एढ़े बार सुहायम ड़ी ।
हक वार फ़रीद नूं यार मिले ।सिरो पंड हिजर दा बार टले ।
जैंदे कारन उम्मर गंवायम ड़ी ।

8. आपे कीतोई यार वे

आपे कीतोई यार वे ।क्युं थी खड़्युं अवाज़ार वे ।
ऐवें न हा लायक पुन्नल ।कल्हड़ी द िवल लधड़ो न कल ।
वंज केच लाययो ऐश गल ।मै गल मोई विच्च बार वे ।
दिलड़ों न सुंजड़ी कूं चहीं ।सरमों कुशरमों आ बहीं ।
शाला सदा तूं खुश रहीं ।असलों नहीं ए कार वे ।
जुड़ जुड़ लगी आ सांवनी ।मुद मसत मींह वसावनी ।
मौसम सुहाग सुहावनी ।मैं सिर डोहाग दा बार वे ।
गई मुफ़त चेतर बहार वी ।सुरख़ी ते कज्जला धार वी ।
महन्दी ते हार शिंगार वी ।कर याद कौल करार वे ।
मा प्यु तत्ती तों दूर है ।डुक्ख दरद कहर कलूर है ।
सांवल सभो मनज़ूर है ।हक्क तूं न थी बेज़ार वे ।
आईआं रुत्तां मन भावणियां ।लालियां लिवन ते कावणियां ।
वल तांघ चावे चावणियां ।वल रस वसूं हिक्क वार वे ।
ग्युं रोल मिट्ठड़ा ढोल वे ।सारे भुले टक टोल वे ।
विसरे अलौल मखौल वे ।डुक्ख सूल नासीं तार वे ।
दिल शींह नेह दे वात है ।हेयात डेहां रात है ।
ए मूंह न मांदी बात है ।दिल हिक लक्ख आज़ार वे ।
किसमत पुट्ठी दियां गालियां ।मारू न पीतां पालियां ।
डे ग्युम मुलक नकालियां ।घर बार बर, घर बार वे ।
डुक्ख प्या पटी दे पेश है ।ग़म सुबह शाम हमेश है ।
दिल ज़खम ज़खमी रीश है ।तौं बिन थविम लाचार वे ।
बाबल दी शफकत खुट्ट गई ।मां मार मार के हुट्ट गई ।
भैणीं दी संगत तरुट्ट गई ।वीरन दा नित्त तक्करार वे ।
जे तईं न डेख़ां वल तैंकूं ।असलों न टिक्क रहसां मुंढो ।
रखसें जे इतनी तांघ तूं ।हुन पार नीला पार वे ।
हुन हट दी कूड़ी चज गई ।नेड़े कनूं दिल रज्ज गई ।
डुखड़ीं तों दिल्लड़ी भज्ज गई ।बस यार ग्यु से हार वे ।
आ आप कीतो प्यार वे ।चा सिर ते डोह हज़ार वे ।
गलड़े, पचार, वयार वे ।ठहन्दी नहीं हुन आर वे ।
सुत्तड़ी कुं कल्हड़ा छोड़ ग्युं ।वागां वतन ते मोड़ ग्युं ।
सुंज बर दी छल विच्च बोड़ ग्युं ।लुट्ट धाड़ ज़ुलम अंधार वे ।
हैं ज़ुलम तो कर बस कैडीं ।रलड़े फ़रीद दे वस्स कडीं ।
वस्स रस्स अते खिल हस्स कडीं ।जीवन दे डेंह हिन चार वे ।

9. आवन दी कर कई सांवल

आवन दी कर कई सांवल ।मुफत न जानोम जोभन ढल ।
सांवन वकत सुहाच दे ।रिम झिम बरसन बादल ।
बठ पए हिजर दे डेंरड़े ।उमर गुजारूं रल रल ।
नाहीं पीत लजावनी ।आंवी राना अज कल ।
परसों तरसों मर सुती ।वल किथ लभस्या मोमल ।
यार लड आवीं आवसीं ।बठ घत राजर दा थल ।
घोलां राज खराज नूं ।वारां साधां सोमल ।
जी कूं चाह मिलाप दी ।दिल कूं तांघ उतावल ।
नैन सिकेते दरस दे ।लावन सखत उबाहल ।
मारू अखियां जाडरू ।नाज़ व चालीं चंचल ।
शोख निगाह मरेलड़ी ।ज़ुलमी ज़ुलफ वलो वल ।
करक न पापन कुंजड़ी ।डाल न हां कूं पल पल ।
कोइल साड़ पजाल्या ।कर कर कूकां वल वल ।
वाह वाह यार दी यारी ।भल भल बिरहों दी अलभल ।
जीड़ा बेकल अखड़ियां ।बल बल दिलड़ी हरमल ।
नेंह निभाया खोटड़ा ।नजरेम सौखा अवल ।
आखर ओड़क थकड़ी ।महज मुइमा ला हल ।
मारू थल दे पैंडड़े ।पेच कुललड़े वल छल ।
थक थक हुट हुट हारड़ी ।हथड़ीं पैरड़ीं कड़वल ।
कहथड़े कहथड़े परीत दे ।साडे डोरे मल मल ।
ऊनी लोई लाज दी ।अतलस मशरू मखमल ।
तौं बिन कौन फरीद दी ।जानी लहसम आ कल ।
जेझी तेझी तैंडियां ।गाल न माही ला गल ।

10. आए मसत देहाड़े सावन दे

आए मसत देहाड़े सावन दे ।वोह सावन दे मान भावन दे ।
बदले पूरब माड़ डखन दे ।कज्जले भुरे सौ सौ वण दे ।
चारे तरफ़ों जोर पवन दे ।सारे जोड़ वसावन दे ।
चकवियां चकवे अग़न पपीहे ।कोइल मोर चचोने चीहे ।
सहंस चकोर चंडूर बबीहे ।शाग़ल गीत शनावन दे ।
डेंहां पीघां सावियां पीलियां ।रातीं खणमियां ख़मन रंगीलियां ।
गज्ज गज्ज गाजा गज्जन रसीलियां ।वकत शिंगार सुहावन दे ।
रोही रावे थिया गुलज़ारां ।थल चतरांग वी बाग़ बहारां ।
घंड तवारां बारश बारां ।चरचे धावन गावन दे ।
चांदनी रात मल्हारी डौंह है ।ठड्डड़ियां हीलां रिम झिम मींह है ।
सोहनी मौसम लगड़ा नेंह है ।गए वेले ग़म खावन दे ।
मुद मसतानी ते खुश दिनड़े ।सालूं सूहे केसर भिन्नड़े ।
सहजों मींह बरसातों सिनड़े ।झगड़े लांघे लावन दे ।
विंह फ़रीद आबाद थ्युसे ।माल मवैशी शाद थ्युसे ।
दिल दरदों आज़ाद थ्युसे ।चोले अंग ना मांवन दे ।

11. ऐ हुसन हकीकी नूर अज़ल

ए हुसन हकीकी नूर अज़ल ।तैनूं वाजब ते अमकान कहूं ।
तैनूं खालक ज़ात कदीम कहूं ।तैनूं हादस ख़लक जहान कहूं ।
तैनूं मुतलक महज़ वजूद कहूं ।तैनूं इलमिया अयान कहूं ।
अरवाह नफूस अकूल मिसाल ।अशबाह अयान नेहां कहूं ।
तैनूं ऐन हकीकत माहियत ।तैनूं अरज सिफ़त ते शान कहूं ।
अनवाय कहूं औज़ाय कहूं ।इतवार कहूं औज़ाय कहूं ।
तैनूं अरश कहूं अफ़लाक कहूं ।तैनूं नाज़ नईम जिनां कहूं ।
तैनूं तत जमाद नबात कहूं ।हैवान कहूं इनसान कहूं ।
तैनूं मसजद मन्दर दैर कहूं ।तैनूं पोथी ते कुरान कहूं ।
तसबीह कहूं ज़न्नार कहूं ।तैनूं कुफ़र कहूं ईमान कहूं ।
तैनूं बादल बरखा गाज कहूं ।तैनूं बिजली ते बारान कहूं ।
तैनूं आब कहूं ते ख़ाक कहूं ।तैनूं बाद कहूं नीरान कहूं ।
तैनूं दसरत लछमन राम कहूं ।तैनूं सीता जी जानान कहूं ।
बलदेव जसोदा नन्द कहूं ।तैनूं किसन कन्हिया कान कहूं ।
तैनूं बरमा बिशन गनेश कहूं ।महांदेव कहूं भगवान कहूं ।
तैनूं गीत ग्रंथ ते बेद कहूं ।तैनूं ग्यान कहूं अग्यान कहूं ।
तैनूं आदम हव्वा शैस कहूं ।तैनूं नूह कहूं तूफ़ान कहूं ।
तैनूं इबराहीय ख़लील कहूं ।तैनूं मूसा बिन इमरान कहूं ।
तैनूं हर दिल दा दिलदार कहूं ।तैनूं अहमद आली शान कहूं ।
तैनूं शाहद मुलक हजाज़ कहूं ।तैनूं बायस कोन मकान कहूं ।
तैनूं नाज़ कहूं अन्दाज़ कहूं ।तैनूं हूर परी गुलमान कहूं ।
तैनूं नोक कहूं तैनूं टोक कहूं ।तैनूं सुरखी बीड़ा पान कहूं ।
तैनूं तबला ते तम्बूर कहूं ।तैनूं ढोलक ते सुरबान कहूं ।
तैनूं हुसन ते हार शिंगार कहूं ।तैनूं विशवा ग़मज़ा आन कहूं ।
तैनूं इशक कहूं तैनूं इलम कहूं ।तैनूं वहम यकीन गुमान कहूं ।
तैनूं हुसन कव्वी इदराक कहूं ।तैनूं ज़ौक कहूं वजदान कहूं ।
तैनूं सकर कहूं सकरान कहूं ।तैनूं हैरत ते हैरान कहूं ।
तसलीम कहूं तलवीन कहूं ।तमकीन कहूं अरफान कहूं ।
तैनूं सुम्बल सोसन सरव कहूं ।तैनूं नरगस नाफुरमान कहूं ।
तैनूं लाल दाग़ ते बाग़ कहूं ।गुलज़ार कहूं बुसतान कहूं ।
तैनूं खंजर तीर तफ़ंग कहूं ।तैनूं बरछा बांक सनान कहूं ।
तैनूं तीर खदंग कमान कहूं ।सुफार कहूं पैकान कहूं ।
बेरंग कहूं बेमिसल कहूं ।बे सूरत हर हर आन कहूं ।
सबूह कहूं कदूस कहूं ।रहमान कहूं सुबहान कहूं ।
कर तोबा तुरत फ़रीद सदा ।हर शै नूं पुर नुकसान कहूं ।
ए पाक अलख बे ऐब कहूं ।उसे हक्क बे नाम निशान कहूं ।

12. अज बन मूं ब्रिज राज बंसरी बजाई

अज बन मूं ब्रिज राज बंसरी बजाई ।
बंसरी बजाई अगम गीत गाई ।
रत्त सुहाग भाग फाग राग रंग पिया संग ।
भइउ आनन्द अमग अमग हर मूं हर्याई ।
कुंज मों भली कृष्ण से खेलूं होरी ।
प्रेम नेम की गुलाल को उड़ाई ।
ऐन बैन चैन में बैन भइउ नहीं बैन ।
अनहद घनघोर शोर जोर से मचाई ।
सुन मांह समाध सुध दा लख लाग रहो ।
महां घट वहद पट जोत हैं जगाई ।
कहां गंग गोमती जमना अर रांम गंग ।
दिल जल मूं टोब टोब तीरथ परसाई ।
काशी, मथुरा, पराग, बरमा, बिशन महेश ।
सब ही अपनूं भेस क्युं परदेस जाई ।
बरम की फ़रीद खेल बिसरी जगत मूं बेल ।
दरमट के फूल को फला कै फल खाई ।

13. अज्ज डोड़ी सिक दीदार दी है

अज्ज डोड़ी सिक दीदार दी है ।मतां आई नगर दिलदार दी है।
अरज मुकद्दस मुलक अरब दी ।हर हर वादी फरह तरब दी ।
मनज़िल तरह अजब दी ।सारी वजाय शिंगार दी है।
हर हर कतरा आंब है कौसर ।गरदो ग़ुबार है मुशक ते अम्बर ।
किरड़ कंडा शमशाद सनूबर ।ख़ार वी शकल बहार दी है ।
अरब शरीफ है सोहनी सारी ।नाज़क नाज़ो ते मतवारी ।
थीवां वारी लक्ख लक्ख वारी ।दार नबी मुख़तार दी है ।
आए हज्ज उमरै दे वारे ।सभ रल मिल लबीक पुकारे ।
जैंदी डेखां रब्ब न मारे ।विस्सरी हुब घर बार दी है ।
आंगन न भावे ते घर खावे ।साड़ै तोल नेहाली भावे ।
कई शै असलौं महज भावे न ।सिक हिक सावल यार दी है ।
इशक फ़रीद ख़रीद कीतोसे ।कल कारों आज़ाद थीउसे ।
सुरखी सेंध मुसारा ग्युसे ।ना कल कज्जले धार दी है ।

14. अज्ज कल अक्ख फुरकांदी है

अज्ज कल अक्ख फुरकांदी है ।कई ख़बर वसाल दी आंदी है ।
वकत मिलन दी मौसम आई ।लज़त रोज़ बरोज़ सवाई ।
खुशियां करदी मां प्यु जाई ।क्या बरदी क्या बांदी है ।
दरदों अलम बरबाद थ्युसे ।जंगल बेला शाद थ्युसे ।
वीराना आबाद थ्युसे ।फरहत मूल न जांदी है ।
हर वेले हर आन है शादी ।डेवन लोक मुबारकबादी ।
हर आज़ारों थई आज़ादी ।सूल कनूं दिल वांदी है ।
रांझन जोगी आइम वेढ़े ।सड़दे मरदे खेड़े भेड़े ।
हुन वत सानूं कौन नखेड़े ।पल पल बाह सिरांदी है ।
थया फ़रीद सुहाग सवाया ।मौला झोक नूं आन वसाया ।
रांझन मैडा मैं घर आया ।जैं कारन दिल मांदी है ।

15. अज्ज मांघ महीने दी नावीं वे

अज्ज मांघ महीने दी नावीं वे ।वल आवीं आ गल लांवीं वे ।
रुत्त रंगीली ते सायत सोहनी ।मौसम गुल फुल दी मन मोहनी ।
मुद मसतानी डुक्खड़ीं कोहनी ।सांवल सेहन सुहावीं वे ।
सईआं नाज़ नवाज़ करेंदियां ।कज्जला सुरख़ी मांग बणेंदियां ।
चेतर सुहेंदियां वर गल लेंदियां ।मैं घर वी पौं पावीं वे ।
मुट्ठड़ी रूप अनूप वसारे ।डुक्खड़ी रोंदी उम्मर गुज़ारे ।
सोहना डे कर कूड़े लारे ।आंदी न मुड़ जावीं वे ।
खेड़े भेड़े रखिन बखेड़े ।सस्स ननाणां लांवम झेड़े ।
चाक महीं दा आ वड़ वेढ़े ।तत्तड़ी नूं न तावीं वे ।
सई्ईआं जुगतां नोकां करदियां ।मेहने हाप करेंदियां बरदियां ।
मिल माही हुन भट्ट घत सरदियां ।ना धूतीं लाज लजावीं वे ।
तौं बिन मेरा होर न कोई ।ताने मारिम ख़लक सभोई ।
रोज़ अज़ल दी तेरी होई ।लगड़ी तोड़ निभावीं वे ।
सालू भिन्नड़ा अख़्ख़ियां नीरे ।चोली चुन्नड़ी लीर कतीरे ।
लूं लूं सीढ़ां लक्ख लक्ख चीरे ।अल्लड़े ज़ख़म मटांवी वे ।
नेंह फ़रीद फ़कर दी मूड़ी ।बाझ बिरहों दे कुल गल कूड़ी ।
मरदी जींदी नीवीं पूरी ।दिल नूं दाग़ न लावीं वे ।

16. अज्ज मांघ महीने दी यारी वे

अज्ज मांघ महीने दी यारी वे ।क्युं बैठीं यार वसारी वे ।
आई मौसम चेतर बहारां ।संगियां सुरतां मिलियां यारां ।
जोभन लहरीं तार मतारां ।हक मैं मुफ़त अज़ारी वे ।
सईआं धांविन गावन गांविन ।सहजे हार शिंगार सुहाविन ।
मांग बणाविन धड़ियां गुंधांविन ।मैं सिर डुक्खड़े बारी वे ।
सुरख़ी कज्जला मैंदी सोंहदी ।हर हिक अपने ढोल नूं मोंहदी ।
मैं मुट्ठड़ी ग़म लुटड़ी लोंहदी ।करदी लक्ख लक्ख ज़ारी वे ।
जेवर पाविन बीड़े लाविन ।कंथ रिझाविन सेझ सुहाविन ।
बांह सिरांदी वर गल लाविन ।मैं हिक्क सूलां मारी वे ।
रुत्त सोहनी ते वकत सुखेले ।अंगन सहेले घर अलबेले ।
मैकूं वी रब्ब रांझन मेले ।किसमत डेवम वारी वे ।
गुल फुल धजरा जोड़ डखाविम ।बुलबुल भौरे खुशियां पाविम ।
वल वल हसरत माड़े आविम ।पल पल चुभिम कटारी वे ।
उज्जड़े सेहरे हार कुमाने ।नाज़ नवाज़ दे टोल वहाने ।
गुज़रे सारे माने तराने ।लग्गड़ी शहर खवारी वे ।
रातीं निन्दर न डेंह करारे ।हर हर वेले दार मदारे ।
तोल नेहाली डिस्सदी दारे ।ततड़ी ओड़क हारी वे ।
बांह चुड़ेली सिक्क सिक्क हुटड़ी ।गल न लावे डेंदा पुठड़ी ।
पीत कुललड़ी रीत अपुठड़ी ।डिठड़ी यार दी यारी वे ।
माही मिट्ठड़ा गल ना लाविम ।गाने गहने खावन आवम ।
बास गुलां दी साह मुंझावम ।साड़े बाद बहारी वे ।
दरद अन्दोह ते रोम कशाले ।सोज़ पज्जाले अक्खियां नाले ।
शाला यार फ़रीद संभाले ।टालिम मूंझ मुंझारी वे ।

17. अजों मारू मिल्यो

अजों मारू मिल्यो ।दिल ना मांदी थी ।
सूहे सज्ज कूं साड़ ते ।वंज मितरां दी थी ।
बांदी बरदी यार दी ।बरदी बांदी थी ।
गैरों उलफ़त यार दे ।दिल्लड़ी वांदी थी ।
नेंह नभेदी मर ग्योम ।पुन्नल कांधी थी ।
तांघ फ़रीद नूं आखदी ।बर डों पांधी थी ।

18. अज्ज पहलों सेज़ सड़ेंदी है

अज्ज पहलों सेज़ सड़ेंदी है ।तत्ती तुल सड़ी चक्क पैंदी है ।
डेंह फ़राक असां सर कड़के ।दिल्लड़ी फ़ड़के छाती थड़के ।
सूल नवीं नित्त डेवन धड़के ।सख़ती सख़त सतेंदी है ।
आए वकत विदा सज्जन दे ।सौहने सांवल मन मोहन दे ।
सुंजड़े सीने बैत हुज़न दे ।दिल्लड़ी झोक डुखेंदी है ।
उजड़ी रंगत फटड़े फुटड़े ।हार हमेलां सेहरे तरुटड़े ।
ए डुक्ख कुट्ठड़े सुखड़ी खुट्टड़े ।पल पल पीड़ मुंझेंदी है ।
वत्तन प्यासां चाईआं खुनकियां ।खुशियां डुस्सकियां मूंझां मुसकियां ।
सानूं डोड़ियां डोड़ियां खुसकियां ।किसमत रुक्ख बदलेंदी है ।
पास न कीती आस दिलों दे ।यारी तरोड़ी यार चहेंदे ।
मान वंजायम मान महीं दे ।जिन्दड़ी ख़तर करेंदी है ।
मसतक लिखड़ी पेस प्यु से ।यार फ़रीद न खड़ मुकल्युसे ।
बेदरदां दे साथ रल्युसे ।सब कई मेहणीं डेंदी है ।

19. अज्ज रंग रुख ते वल्या है

अज्ज रंग रुख ते वल्या है ।मतां माही माहनू घल्ल्या है ।
जंगल बेले सबज़ी चाई ।रौनक रोज़ बरोज़ सवाई ।
रल मिल सईआं डेवन वधाई ।रांझन लूं लूं रल्या है ।
कान्ह कहेले ख़ुनकी चाई ।चाई ल्यादे पूर ललाई ।
गुल फुल करदे हुसन न माही ।सुख मिल्या डुक्ख टल्या है ।
रांझन जोगी मैडा माही ।मैं बेवाही दा है वाही ।
रोज़ अज़ल तों उसदी आही ।जैं दिल्लड़ी नूं मल्या है ।
ढोलन डिती बांह सिरांदी ।सस्स ननान थई दरमांदी ।
खेड़ीं भैड़ीं हसरत आंदी ।कोई गल्या ते कोई जल्या है ।
माही कीते झोकीं देरे ।थए हन मेरे भाग भलेरे ।
हत्थ गाने सर सोंहदे सेहरे ।बाग़ खुशी दा फल्या है ।
थीवसै सूल कनूं जीवांदा ।गुजर्या वेल्हा वकत डुक्खां दा ।
यार फ़रीद मिल्युम दिल भांदा ।बख़त असां वल ढल्या है ।

20. अज्ज सांवलड़े मुकलाया

अज्ज सांवलड़े मुकलाया ।सर बार डुक्खां दा चाया ।
ए किबला अकदस आली ।हर ऐब कनूं है ख़ाली ।
अब अदब अबीद सवाली ।जो जो मंग्या सो सो पाया ।
वाह ! अमन अल्ला मुअज़म ।वह हरम अल्ला महर्रम ।
वाह ! बेत अल्ला मकर्रम ।रहमत दा सरमाया ।
ए नूर स्याह मजस्सम ।है ऐन सवादल आज़म ।
थिया बेशक आमन बे ग़म ।जो हरम इहाते आया ।
कर याद हरीम हरम कूं ।रख पेश पराने ग़म कूं ।
दिल आखे खांवां सम कूं ।है जीवन कूड़ अजाया ।
हुन वागां वतन वलाईआं ।लख मूंझ मूंझारियां आयां ।
दिल सचड़ियां पतियां लायां ।दिल मेलीं बार खुदाया ।
दिल दिलबर कीते सिक्के ।घर शहर बाज़ार न टिक्के ।
वंज (वनीह) खोसूं तौफ दे धके ।वल जेकर बखत भड़ाया ।
बिन यार फ़रीद नजरसां ।रत्त रो रो आहीं करसां ।
ग़म खा खा ओड़क मरसां ।डुख डुखरीं जीड़ा ताया ।

(सांवलड़े=काबे दा सांवला रंग, बार=भार, डुखां=दुक्खां,
अकदस=पवितर, अबद=दास, अबीद=छोटा दास, अमन=
आराम घर, मुअज़म=माणयोग, हरम=घर, महर्रम=आदरयोग,
सवादल=मक्का शरीफ़, आमन=आउणा, हरीम=वेहड़ा, सम=
ज़हर, मूंझ=दुक्ख,रंज, सिक्के=लगन, खोसूं=खावांगे, तौफ=प्रकरमा,
भड़ाया=मद्दद कीती, जीड़ा=जिय)

21. अज्ज शबरियां शगफ़ भांदे हिन

अज्ज शबरियां शगफ़ भांदे हिन ।मतां देस पुनल दे आंदे हिन ।
नाज़ जमल जमील वतन दे ।राहीं राहन्दे राह सज्जन दे ।
हर दम होवन नाल अमन दे ।साथी दरदमन्दां दे हिन ।
लब मुसकाविन अक्खियां फुरकन ।रग रग बुलके दिलरियां सुरकन ।
ग़म ग़म खाविन डुक्खड़े कुरकन ।सूल सिरों नस्स जांदे हिन ।
सोहने जमल जमील बदावी ।शमस वकमर दे नाल मसावी ।
सारे हुसन जमाल दे हावी ।साडे गोशे हां दे हिन ।
बद्दली जुड़ गनघोर मचाई ।फोगी लानी :खुनकी चाई ।
नाज़ करेंदी लाई लाई ।आरफ इबरत खांदे हिन ।
आए भाग सुभाग सिद्धाए ।भागो भाग डुहाग सिद्धाए ।
तन मन डुखड़ झाग सिद्धाए ।जो चांहदे सो लहन्दे हिन ।
बेंसर बोले बैने ठुमकन ।वालियां वाले झुमके झिमकन ।
कड़ियां नूरे पैरीं घुमकन ।ज़ेवर तरेवर टहन्दे हिन ।
ज़ुलफां सहजों सौ वल पावन ।तिलक तिलोले लतके लाविन ।
सुरख़ियां कज्जल मुसाग सहावन ।हार सिंगार सुहांदे हिन ।
ताल्यां भले बख़त सवल्ले ।आए महज़ फ़रीद दे वल्ले ।
पल पल यार सनेहड़े घल्ले ।डेंह डुक्खां तों वांदे हिन ।

22. अज वेड़ा प्या भांदा है

अज वेड़ा प्या भांदा है ।कोई वसल सनेहड़ा आंदा है ।
मिल मिल आए बादर कारे ।बिजली चमके मींह फंग़ारे ।
राज गाज करे धदकारे ।झोक सहाग सुहादा है ।
टोभे उछलन माल न मावे ।रातीं यार असां गल लावे ।
हर कई फ़रहत नाल निभावे ।हक डुक्ख डुक्ख प्या खांदा है ।
कोइल कूके मोर चंघाड़े ।अगन पपीहे करन बुलारे ।
हर हर वहशी कर ललकारे ।गीत ख़ुशी दे गांदा है ।
दशत बियाबान डिस्सन बहारां ।बूटे बूटे सहंस तवारा ।
राहत होई है तार मतारां ।चोले अंग न मांदा है ।
चुणके करदे चिनक सहेली ।वेले आन संभालिअम बेली ।
सेध फ़रीद रक्खां क्युं मेली ।नाज़ नवाज़ सभांदा है ।

23. अज्ज ज़ेवर पए टहन्दे हिन

अज्ज ज़ेवर पए टहन्दे हिन ।
मतां डेंह सुहाग दे आंदे हिन ।

कजला मारू दीदां भाले ।
सुरखी मुसक मुसक ग़म टाले ।
बूले बैने ते कटमाले ।
सहजों लचके खांदे हिन ।

बाद समाली लुरके लुरके ।
बारश रिम्म झिम्म बुरके बुरके ।
अक्खियां फुरकन लूं लूं मुरके ।
ठर गए गोशे हां दे हिन ।

जींदे अरब शरीफ डिट्ठोसे ।
लुहदीं सिदकी ना मरग्युसे ।
सोहने सांवल याद कितोसे ।
हार शिंगार सुहांदे हिन ।

सदके सदके वारी वारी ।
ओले घोले लक्ख लक्ख वारी ।
सर कुरबान ते जान नसारी ।
मिलक मिट्ठे मितरां दे हिन ।

वादियां राह मदीने वालियां ।
सागी बाग़ बहशती चालियां ।
हर हर आन सदा खुसहालियां ।
सुख सेहरे डुक्ख मांदे हिन ।

अरब शरीफ दी सोहनी रीते ।
लावे दिल नूं परम पलीते ।
विसरे चाचड़्ड़ सदके कीते ।
असलों महज़ न भांदे हिन ।

हुसन जमाल दी धरती आई ।
सभ शै चाहरी तरज़ डक्खाई ।
फ़रहत रोज़ फ़रीद सवाई ।
डुक्खड़े मांदे सांदे हिन ।

24. अल्ल फाल फ़राक डसेंदी है

अल्ल फाल फ़राक डसेंदी है ।मता यार कनूं निखड़ेंदी है ।
सखतियां वधियां सुख थए थोले ।रंजो अलम ग़म सोज़ समोले ।
चरखा डुक्खड़ी रूं रूं बोले ।तन्द डिंगी वल पैंदी है ।
सेधां कज्जड़ियां मेंदियां फिक्कड़ियां ।कजले उजड़े सुरख़ियां बिखड़ियां ।
यासां मिलियां आसां निक्खड़ियां ।लूं लूं वैन वलेंदी है ।
तूल नेहालियां दार डिस्सीजन ।हार फुलां दे ख़ार डिस्सीजन ।
सेहन हवेलियां बार डिस्सीजन ।सब शै मुंझे वधेदी है ।
भाग ग्या बद बख़ती जागी ।बांह चुड़ेली थीवम डुहागी ।
जैंदीं डेखां सावल सागी ।जिन्दड़ी मर मर वैंदी है ।
टुट्टे कंगन, कड़ियां, नेवर ।टुक्कड़े बैने, बोले, बैंसर ।
कटमाले थए नांग बराबर ।चुहम्ब कली चक पैंदी है ।
नज़र न आवे रांझन माही ।कीतुस बेकस ते बेवाही ।
मूंझ मुंझारी गल दी फाही ।सबर आराम वंजेंदी है ।
दरद कनूं मूंह सावा पीला ।चोला काला बोछन नीला ।
तौं बिन साडा कोझा हीला ।हर कई सख़त अलेंदी है ।
सौन शगून सभे थए पुट्ठड़े ।वसल वसाल दे सांगे तरुट्टड़े ।
नैन न भाए रो रो हुट्टड़े ।दिल्लड़ी केस करेदी है ।
चेतर बहार ख़िज़ां डिस्सीजे ।झोक सभो वीरान डिस्सीजे ।
न कोई इलम न बा ।रोही डैन ड्रेंदी है ।
यार फ़रीद न खड़ा मुकलाया ।बार बार हिजर सिर आया ।
सिक साड़्या ते तांघां ताया ।किसमत रोधे डेंदी है ।

25. अलफ़ हिको हम बस वे मियां जी

अलफ़ हिको हम बस वे मियां जी ।
होर कहानी मूल न भानी ।अलफ़ ग्युम दिल खस वे मियां जी ।
बे ते दी बई कल न काई ।अलफ़ कीतम बे वस्स वे मियां जी ।
ठप्प रख़ फिका असूल दे मसले ।बिरहों बाब दा डस्स वे मियां जी ।
जे कर लगड़ो चाट बिरहों दी ।जाया कूं डेसीं डस्स वे मियां जी ।
जे न सबक बिरहों दा डित्तड़े ।अज्ज कल वैसां नस्स वे मियां जी ।
बिरहौं सिख़ी ते बिरहों सिखाईं ।हई साबस शाबस वे मियां जी ।
जींदी होई हिक्क यार दे रहसूं ।विस्सरी होर हवस वे मियां जी ।
मंतर परीत दा फूक सुकारी ।लिंगड़ी हम आलस वे मियां जी ।
उलफ़त ज़रदी घरदी वरदी ।ना रह गई हिक्क खस वे मियां जी ।
रांझन मैंडा मैं रांझन दी ।खेड़्यां दे मूंह भस्स वे मियां जी ।
सट्ट घर बार ते बार वसेसां ।बदलीं कीती लस्स वे मियां जी ।
इलम अमल भुल वैसी जेकर ।इशक प्यु कन रस वे मियां जी ।
ओड़क इशक अन्दर जिन्द डेसू ।ना समझीं खिल हस्स वे मियां जी ।
नेंह कडोकड़ां प्युसे पुखड़े ।ना हई कलम ते मस्स वे मियां जी ।
ना अज्ज कल दी यार दे वल्ल दी ।रोज़ अज़ल दी हस्स वे मियां जी ।
इशकों मूल फ़रीद न फिरसूं ।रोज़ नवीं हिम चस्स वे मियां जी ।

26. अल्ला मेले वल संग यारा

अल्ला मेले वल संग यारा ।बरदी तौं दिलबर दी ।
नाज़ नज़ाकत हुसन मलाहत ।क्या चालीं क्या ढंग यारा ।
सोहनी तरह नज़र दी ।
इशवे गमज़े करन लड़ाई ।चशमां करदियां जंग यारा ।
डाढे ज़ुलम कहर दी ।
हर हर काकल नांग वराधा ।ज़ुलफ मरेंदी डंग यारा ।
लड़दी मूल न लड़दी ।
कामत यार क्यामत सारी ।सहंस फ़रेब फरंग यारा ।
करदी जो जो सरदी ।
तीर निगाह दा रग रग रच्या ।सारा बदन चोरंग यारा ।
लगड़ी नोक हुनर दी ।
इशक फ़रीद रुलायम बरोच ।हड्ड हड्ड ते अंग अंग यारा ।
निखड़िअम कूंज वल्हर दी ।

27. अलयौम बसर हदीद वे

अलयौम बसर हदीद वे ।हर वकत यार ते दीद वे ।
खोल्ही इशक कलब कलीद वे ।थए गुझ्झड़े राज़ पदीद वे ।
डेंह रात साडड़ी ईद वे ।थया बुअद सग़त बईद वे ।
गैरों है कता बुरीद वे ।हुट खट गई तकलीद वे ।
दिल मिल घटी तौहीद वे ।है हाल रोज़ मज़ीद वे ।
हर लहज़ा शौक शदीद वे ।हर आन ज़ौक जदीद वे ।
अमाग नफ़श अनीद वे ।कर सुलह थ्युम मुरीद वे ।
वोह जज़द दी ताईद वे ।वोह फ़कर दी तमहीद वे ।
थी महव गुफ़र शनीद वे ।गए विस्सर वाअद वईद वे ।
रहन्दी नहीं तशदीद वे ।कावड़ अते तहदीद वे ।
एहो अदनूं अबद फ़रीद वे ।अज़लों है दीद ख़रीद वे ।

28. अनहद मुरली शोर मचाया

अनहद मुरली शोर मचाया ।
गुर ने पूरे बेद बताए ।अकल फिकर सभ फहम गमाए ।
मदहोशी विच होश सिखाए ।सारा सफ़र अरूज सुझाया ।
वहदत ऐन अयां डिठो से ।तमस हकीकी समझ ल्यु से ।
मख़फ़ी कुल इज़हार थ्युसे ।हर गुन ग्यान दे गीत नूं पाया ।
थीए वाज़ह मशहद दकायक ।थीए लायह अनवार हकायक ।
ज़ाहर गुझ सब कुझ दे लायक ।करब ते बोअद दा फ़रक उठाया ।
बंसी ख़ूब बताईआं बातां ।गुझड़े राज़ अनौखियां घातां ।
गुम थियां कूड़ियां ज़ात सिफ़ातां ।लिमन अलमुलक दा दौरा आया ।
ख़मर तहूरों पी पैमाने ।थीउसे आशक मसत यगाने ।
भुल गए सौम सलवात दोगाने ।रिन्दी मशरब सांग रसाया ।
जाने कौन गंवार मुकल्लद ।वह वह रीत मकदस जय्ईद ।
थी मुतलक बे कैद मवहद ।सभ सूरत विच आप समाया ।
जब हक रमज़ मिली तौहीदों ।दिल आज़ाद डिठम तकलीदों ।
थीकर फ़रद फ़रीद ! फ़रीदों ।सर्री रूही वाअज़ सुणाया ।

(बेद=भेद, अरूज=उच्चता, वहदत=रब्ब दी एकता, अयां=
ज़ाहर, तमस=दूई दा मिट जाणा, मख़फ़ी=गुझ्झा, वाज़ह=
ज़ाहर, मशहद=वेखन विच आ जान वाला, दकायक=भेत
दियां गल्लां, लायह=ज़ाहर, अनवार=रौशनी दियां किरणां,चमक,
गुझ=भेत,रहस्स, करब=नेड़ता, बोअद=दूरी, सिफ़ातां=सिफ़तां,
लिमन अलमुलक=रब्ब पुच्छेगा, 'अज्ज मुलक किसदा है ?' जवाब
मिलेगा, 'इह ख़ुदा दा है जो सभनां उत्ते भारू है', ख़मर तहूरों=
सवरग विच मिलन वाली पवितर शराब, पैमाने=प्याले,
यगाने=बेमिसाल, सौम-सलवात=रोज़ा ते नमाज़, मशरब=
तरीका, गंवार=जाहल, अग्यानी, मुकल्लद=पैरवी करन
वाला, रमज़=इशारा, तौहीद=रब्बी एकता, तकलीद=पैरवी
करना, फ़रद=इकल्ला, सर्री रूही वाअज़=मेरी ज़मीर ते मेरी
रूह है ।)

29. असां कनूं दिल चाययो वे यार

असां कनूं दिल चाययो वे यार ।जापै किथां वंज लाययो ।
यार बरोचल कीच दा वाली ।कीतो हाल कनूं बेहाली ।
परबत रोह रुलाययो वे यार ।
मुलक मल्हेर लितो नी झोका ।मैं कल्हड़ी विच ओपर्यां लोकां ।
हक तिल तरस न आइयो वे यार ।
मैं कमली क्या जाना नेंह कूं ।ज़ुलमी नहर ते कहर शीना कूं ।
आपे दीद अड़ाययो वे यार ।
आपे आपना सोहां कीतो ।करहो कतार्यो नाल न नीतो ।
कैं धोती बरमाययो वे यार ।
यार मुठी कूं डितोड़ रोला ।साड़्यो कीतो कीरी कोला ।
ततड़ी कूं क्यो ताययो वे यार ।
आपे शहर भंभोर डो आइयों ।यारी लाकर छोड़ सिधाययों ।
मुफता कूड़ कमाययो वे यार ।
यार फरीद कडां संभलेसी ।सहजो सड कर कोल पल्हेसी ।
जे वत बखत भड़ाययो वे यार ।

30. असानूं रहन न डेंदी

असानूं रहन न डेंदी ।लगी पुनल दी तांग ।
कनड़ीं वलदी रोज़ अज़लदी ।बिरहों सुणाई बांग ।
कुठड़ी मुठड़ी जावन लादी ।डंगड़ी नेंह दे डांग ।
दिलड़ी दुशमन सखत सताए ।सीने चुभड़ी साग ।
यार बरोचल केचे सिधाया ।जालां कैंदे सांग ।
मारू थल दी पटड़ी लंमड़ी ।डिसम फरीदन टांग ।

31. असां सो बदमसत कलन्दर हूं

असां सो बदमसत कलन्दर हूं ।कडी मसजद हूं कडीं मन्दर हूं ।
कडीं चोर बणूं कडीं जार बणूं ।कडीं तोबा इसतगफार बणूं ।
कडीं ज़ोहद इबादत कार बणूं ।कडीं फ़िसक फ़जूरी अन्दर हूं ।
कथां दरद कथां दरमान बणूं ।कथां मिसर कथां कनाअन बणूं ।
कथां केंच भंभोर दा शान बणूं ।कथां वासी शहर जलंधर हूं ।
किथां समूय दैर कनशत कथां ।कथे दोज़ख बाग़ बहशत कथां ।
कथे आसी नेक सरिशत कथां ।कथे गुमराह हूं कथे रहबर हूं ।
हयूं ओ कलाश ते रिन्द असां ।पई निवदी है हिन्द सिंध असां ।
हयूं बेशक आरफ़ चिन्द असां ।कुल राज़ रमूज़ दे दफतर हूं ।
हन नाज़ नवाज़ दे टोल कडीं ।है मूंझ मुंझारी कोल कडीं ।
रेल ढोल कडीं ग्या रोल कडीं ।कडीं बरदर हूं कडीं दरबर हूं ।
वल वातों समझ फ़रीद अल्ला ।कर महज़ ना शियर जदीद वला ।
है चालों हाल पदीद भला ।तूने किजो सारे अबतर हूं ।

32. बैठी रो रो उमर निभाईआं

बैठी रो रो उमर निभाईआं ।सभे ख़ुशियां इशक वंजाईआं ।
वाह सांवल दी धार कज्जल दी ।बे शक तेग़ अज़ल दी ।
दीदां तीर चलावन कारी ।पलकां करन लड़ाईआं ।
इशवे गमज़े नाज़ नहोरे ।नखरे नोकां टोकां ।
हुसन मलाहत शकल शबाहत ।सारियां तरहें सिद्धाईआं ।
हंजड़ू जारी तुनले रतड़े ।पपलियां उजड़ियां पुजड़ियां ।
लोकां लेखे अक्खी आईआं ।ज़ालम बिरहों चौं भाईआं ।
मेहनड़ीं मिट्ठड़ीं दरद अन्देशे ।डुक्खड़े पुखड़े आइम ।
दिलड़ी सख़ती मिलड़ी सुंजड़ी ।औखियां यारियां लाईआं ।
मुफ़त मलामत सख़त नदामत ।शहर शिकायत चायम ।
वेढ़े यार फ़रीद न आइम ।मसतक लिखियां पाईआं ।

33. बण दिलबर शकल जहान आया

बन दिलबर शकल जहान आया ।हर सूरत ऐन अयान आया ।
कथे आदम कथे शैस नबी ।कथे नूह कथां तूफ़ान आया ।
कथे इबराहीम ख़लील नबी ।कथे यूसफ़ विच कनआन आया ।
कथे ईसा ते अल्यास नबी ।कथे लछमन राम ते कान्ह आया ।
कथे ज़करिया कथे याहा है ।कथे मूसा बिन अमरान आया ।
बू बकर उमर उसमान कथां ।कथ असद अल्ला ज़ीशान आया ।
कथे हसन हुसैन शहीद बने ।कथे मुरशद फ़खर जहान आया ।
कथे अहमद शाह रसूलां दा ।महबूब सभे मकबूलां दा ।
उसताद नफूस अकूलां दा ।सुलतानां सिर सुलतान आया ।
तनज़ील कथां, जबरील कथां ।तोरेत ज़बूर इंजील कथां ।
आयात कथां तरतील कथां ।हक बातल दा फुरकान आया ।
कुल्ल विच कुल्ल शै ज़ाहर है ।सोनढ़ा ज़ाहर ऐन मज़ाहर है ।
कथे नाज़ न्याज़ दा माहर है ।कथे दरद कथां दरमान आया ।
कथे रीत परीत दा वेस करे ।कथे आशक थी प्रदेस फिरे ।
खुले गल विच मारू केस धरे ।लिट धारी थी मसतान आया ।
कथे पंडत जोसी जोगी है ।कथे सामी ते कथे भोगी है ।
कथे मिसर बरागी रोगी है ।कथे बेद ब्यास ग्यान आया ।
खामोश फ़रीद इसरार कनूं ।चुप बेहुदा गुफ़तार कनूं ।
पर ग़ाफ़ल ना थी यार कनूं ।एहो लारेबी फ़ुरमान आया ।

(दिलबर=प्यारा, अयान=ज़ाहर, कथे=किते, असद=ख़ुदा
दा शेर, ज़ीशान=शान वाला, नफूस= रूहां, अकूलां=फरिशते
तनज़ील=कुरान,वही, तरतील=सुरीली आवाज़ नाल पढ़ना,
मज़ाहर=ज़ाहर होन दी थां, दरमान=इलाज, मारू=मारन वाले,
सामी=सवामी, भोगी=ग्रहसथी, इसरार=भेत, लारेबी=रब्ब दा)

34. बरी बेज़ार हिन ज़ातों सिफ़ातों

बरी बेज़ार हिन ज़ातों सिफ़ातों ।मसत जानानों ।
महज़ आज़ाद हिन नामों निशानो ।दीन ईमानों ।
छुटे अकरों लंघे फकरों ।इबादतों अतों फ़िकरों ।
गुज़र कर ज़ाकरों ज़िकरों ।निकल गए कौन इमकानों ।
थई दिल दूर अगयारों ।भरी मामूर दिलदारों ।
प्युसे ख़बर आसारों ।ते अख़बारों ते कुरानों ।
जिड्डां डूं तरीं तूं ग़ाफ़ल है ।तिड्डां हिक्क नाल वासल है ।
लद्धा करबलु नवाफ़ल है ।दिल ईकानों ते अहसानों ।
डित्तियां उसताद उसतादियां ।हमेशा रात डेंह शादियां ।
थिया सुंजर ते आबादियां ।शहूदो ज़ौक वजदानों ।
जिथां ख़ुद करब है दूरी ।उथां क्या वसल महजूरी ।
माननियत थैई पूरी ।है इनसानों ते रहमानों ।
अजब मशरब ते मिल्लत है ।सभो वसअत न किल्लत है ।
न अनियत दी इलत है न हुसनातों न असयानों ।
फ़रीद आई है हूश्यारी ।पुख़तगी चित्त अन्दर सारी ।
पई बुद्ध सुद्ध सजी सारी ।जगाई जोत तन जानों ।

35. बट्ठ घत कूड़ निकमड़े

बट्ठ घत कूड़ निकमड़े ।हक हक कूं कर याद ।
थी कर गहला रत पूं ते ।करदीं धाह फर्याद ।
बाझों अहद हकीकी ।मह्हज ख़राब आबाद ।
हुसन मजाज़ी कूड़ा ।है फ़ानी बरबाद ।
किथ मजनूं किथ लेला ।किथ शीरीं फ़रहाद ।
कुल शै गैर ख़ुदा दी ।हालक बे बुन्याद ।
बांझ मुहबत जाती ।कोझा शोर फसाद ।
मुरशद फ़खर जहां ने ।कीतम ए इरशाद ।
आरफ इबनल अरबी ।साडा है उसताद ।
समझ फरीद हमेशा ।रहो गैरो आज़ाद ।

36. बट्ठ मघ्याना राज बबाणा

बट्ठ मघ्याना राज बबाना ।वाह भाने मन भाने अस्साडे ।
सतर धूईं कान्ह कहेले ।बेशक माने तराने अस्साडे ।
सुणों सहेलियां सेगियां सईआं ।बिरहो डित्तियां डुक्कतीं हत बईआं ।
चोला बोछन धईआं धईआं ।ख़ून जिगर थए खाने अस्साडे ।
हार हंजूं दा गल विच्च पावां ।सूलां दी नित्त सेझ सुहावां ।
मा प्यु भावां मूल न भावां ।वैरी दोसत पुराने अस्साडे ।
ज़ुअफ़ बदन विच्च सुरत न तन विच्च ।भा जिगर विच्च दूद दहन विच्च ।
दिल्लड़ी ग़रक अन्दोह मेहन विच्च ।रो रो नैन कमाने अस्साडे ।
छड्ड ग्या केच शहर दा वाली ।थल मारू दी कक्कड़ी वाली ।
कक्कड़े कंडरे तूल नेहाली ।डिल्ह सिल्ह पत्थर वहाने अस्साडे ।
पींघ पिप्पल मलकाने भुल्ल गए ।गाने गहने सेहरे फुल गए ।
घर दर जाह टिकाने रुल गए ।पिड़ पए यार अयाने अस्साडे ।
मुफ़त फ़रीद निदामत चायम ।समझ संभल कर नेंह न लायम ।
सारी पत परतीत वंजायम ।थिड़ गए अकल स्याने अस्साडे ।

37. बेरंग रावल दे कीते

बेरंग रावल दे कीते ।रोंदी वतां रुड़दीं वता ।
दिल संग सांवल दे सिवा ।सौ सूल लक्ख सिठड़ीं सहां ।
सिक सुख सभो सही सच्च ख़ेस ।डुक्ख रंज वेढ़े विच्च वस्से ।
दुशमन सज्जन हर हिक हसे ।टोकां करम सारा जहान ।
कीतो पुनल वाह वैर वे ।वंज केच लाययो देर वे ।
डुक्खड़े डित्तोनी ढेर वे ।सुंज बर फिरां सिर भर डहां ।
दिलड़ी ग़मां दी भैन है ।सूलां डुक्खां दा वैन है ।
परभत जबल चट डैन है ।चाढ़आ चढ़ां लाहआ लहां ।
सब आस हो गई यास है ।हरदम उदास हरास है ।
मूनस नहीं कोई पास है ।है दिल कहां दिलबर कहां ।
आरद फ़रीद ईं इलतजा ।रहमे बहाल बे नवा ।
दारद गदा उमीदहा ।सद गूना ज़ अलताफ शहां ।

38. बेशक जाणां, बेशक जाणां

बेशक जाणां, बेशक जाणां ।सोहनड़्यां कूं है सखत ग़रूर ।
मूंह सर खाक शिंगार असाडे ।हंजड़ू हारिन हार असाडे ।
होत है केच, ते केच है दूर ।
यार नवीं नित यारी लावे ।किवें साड़ सूल सहावे ।
दिलड़ी नाज़क नरम करूर ।
डेंह ततीं हड मास कूं चरदी ।रात नजर दी आहीं करदी ।
सड़ सड़ मरदी सुबह सहूर ।
पड़ बिसमिला डुख चीसां ।खुशियां कर कर झोली पैसां ।
जे वत तैकूं है मनजूर ।
दूर वसे मनजूर दिलें दा ।आवे मौत न मेला थींदा ।
फ़जरीं पेशी कहर कलूर ।
उठदीं, बहन्दीं वैन वलावां ।रोवां खावां गावन गांवां ।
हर हर रग है तार तम्बूर ।
जैं डेंह दियां वल लगड़ियां तांघां ।उजड़ियां सुरखियां महन्दियां माघां ।
बोले बैने बेसर चूर ।
यार फ़रीद नूं डितेड़ रोधे ।सचु आख्या हां कमर व शेदे ।
बेदरदां नाल नेंह लावन कूड़ ।

39. बे सूरत सूरत ओल्हे

बे सूरत सूरत ओल्हे ।कर नाज़ अदा घुंड खोल्हे ।
हर हर जा विच्च रांझन माही ।आया नाल सफ़ात कमाही ।
हर सुर अनहद मुरली वाही ।रमज़ हकायक चोले व फी ।
अनफसिकम' भेत बतावे ।'नहुन अकरब' बीन बजावे ।
'लोद लैसम' गीत सुणावे ।लफज़ अनलहक बोले ।
जो कोई दिल डूं ध्यान रखेसी ।सारे गुझ्झड़े राज़ नूं पेसी ।
असनीनीत कुल उट्ठ वेसी ।भज्ज पौसन सभ भोले ।
हक्क जा हन अहकाम शरियत ।हक्क जा हन इसरार तरीकत ।
थीवे क्या दर्याफ़त हकीकत ।कौन ए फोले फोले ।
ना रुल डुक्खड़ी रोह जबल विच्च ।ना थी औखी मारू थल विच्च ।
पहलू दोश किनार बगल विच्च ।यार पुन्नल है कोले ।
फ़खर जहां हिक्क रीत सिखाई ।असलों हाजत रही न काई ।
दिल जुड़ जुड़ धूम धाम मचाई ।थए गुन ग्यान समोले ।
रंग पुर दे हिन पंथ न्यारे ।हक्क नूं बोड़े हिक नूं तारे ।
हक्क प्या जिते हिक्क प्या हारे ।तुलदे मासे तोले ।
फ़ाश फ़रीद ए वाअज़ सुना तूं ।आलम जाहल शाहगदा कूं ।
जे कोई चाहे फ़कर फ़ना कूं ।अपने आप कूं गोले ।

40. भान वसाया यार चहींदे

भान वसाया यार चहींदे ।बेट सुहाया मान महींदे ।
असलों मूल न वेसां रोही ।कान कहेले दिल्लड़ी मोही ।
रांझन दीसर चीसां डोही ।तन मन मिलक तहींदे ।
ग़ाईं वेच ते मंझियां लेसां ।नैं चन्दन ते झोक बणेसां ।
बेला बेली नाल सुहेसां ।जेड़ा चाक सडींदे ।
मांग ढाले पावां फालां ।सारी उम्मर तैडे संग जालां ।
रंगपूर साड़ां साड़ पजालां ।बट्ठ खेड़े मोए जींदे ।
जां जां कनड़ी रिंग सुणेदी ।जिदड़ी सदके घोले थएंदी ।
पाह हम्बाह ते धूड़ महींदी ।डिस्सदा नूर अक्खीं दे ।
हर दम यार दे नाम सडीवां ।शाला न बेवाही थीवां ।
बाझ तैडी दे बाझ न जीवां ।ब्या कोई कौन कहीदे ।
हीर सलेटी चूचक बेटी ।नाज़ पननी मुशक लपेटी ।
आ तकदीरों चाक चकेटी ।हुन डेखो क्या थीदे ।
चाकी अलड़े चाक चकाए ।विसर्या मा प्यु माप्यो जाए ।
मामे चाचे ते हमसाए ।आन सूहीं नजरींदे ।
पार झनाहों रांझन आया ।झंग स्यालीं फेरा पाया ।
हीरे नूं जुड़ जादू लाया ।किवें छुप छपींदे ।
घटड़े वकड़े टोभे ताडे ।सभ वस गए नेड़े ताडे ।
आ वस सावल कोले साडे ।बट्ठ घत दरोह दिलींदे ।
मौसम मसत डेहाड़े भलड़े ।डागां मिलड़े सावे तलड़े ।
भाग सुहाग फ़रीद सवल्लड़े ।अक्खियां नाल डिसींदे ।

41. बिन दिलबर आहीं कर कर

बिन दिलबर आहीं कर कर ।कई रातीं डितम सहर कर ।
रोह रोही रावे रुलदी ।नित कदम कदम ते भुलदी ।
कडी थक बहन्दी जुलदी ।हुन सांवल यार वहर कर ।
डोखी डुखड़े संज सबाहीं ।डूंघे डूंगर कोझियां जाहीं ।
जिथ मम्मियां गौल बलाईं ।रिछ राख़श भजदे डर कर ।
बिन आशक अहल वफ़ा दे ।बिन शायक जौक लका दे ।
बिन साहब सिदक व सफा दे ।इथ आवे कौन गुज़र कर ।
लड नीतो झोक परेरे ।दिल दरदां लायम देरे ।
डिसे रोटी हां दे बेरे ।पीवां पानी खून जिगर कर ।
थीए कंडड़े तूल नेहाली ।घर डेवम डैन डिख़ाली ।
वल होत दलेंदा वाली आ सीने साडे घर कर ।
ग्यों वैरी केच सफ़र कर ।जी जाल्यो ज़ुलम कहर कर ।
जुख जुखदी वैसां मर कर ।थल मारू गोर कबर कर ।
सोहना यार फ़रीद डों आवे ।गल लावे सेझ सहावे ।
आ ! उजड़ी झोक वसावे ।ठंडड़ी आह असर कर ।

42. बिन्दरा बन में खेले होरी

बिन्दरा बन में खेले होरी ।शाम दवारे मेरो लाल ।
अधर मधर मूं बंसी बाजे ।चौरासी लख साज आवाजे ।
भूली काया माया मूड़ी ।सुन के ग्यान अनोखे ख्याल ।
तरखट जमका तरफ़ट नाउं ।दुरमत दवैत पाप मिटाऊं ।
पी के पै संग परेम कटोरी ।नाचत गावत रंगरस ताल ।
अनहद घोर गगन मूं ग़ाजे ।चंग मरदंग लखो लख बाजे ।
लागी जोरी सबद टकोरे ।बरसत गुर परतीत गुलाल ।
ब्रिज मूं धूम परी धन लागे ।अभिमान टुटे कुबुध्या भागे ।
बांह मरोरे बंगरी तोड़े ।कवर कन्ही चंचल चाल ।
दास फरीद आकास हमारा ।देस एहो अबनास हमारा ।
आतम सूं की लागे चोरी ।हूं मैं संसार हत पताल ।

43. बिन यार मिट्ठल मैं वैसां मर

बिन यार मिट्ठल मैं वैसां मर ।जै बाझों हिक पल को ने सरे ।
छड्ड होत इकल्लड़ी केच ग्या ।सौ पीड़ उट्ठी लक्ख पूर प्या ।
पिटी पिट्ट पिट्ट हुट्टड़ी शाम सहर ।पट्टी पीत दे डिस्सदे पंध परे ।
मिट्ठा मारू मुहब मल्हेर वस्से ।रत्त रोवां सारा लोक हस्से ।
थीसां बर डोराही सट घरदर ।तोड़े यार कबूल करे न करे ।
कुट्ठी नाज़ निगाह अव्वैड़े दी ।मुट्ठी लज़त इशक बखेड़े दी ।
मोई जींदी तां दमे रोज़े हशर ।अला दिल तों मूल नहीं विस्सरे ।
वाह दिलबर तैंडरी यारी है ।लगी फकड़ी शहर खवारी है ।
दिल सड़दी जलदे जान जिगर ।सर टोटे पुरज़े सहंस ज़रे ।
शाला थीवम वसल दा साग कडीं ।मिटे लुटड़ी दिल दी तांग कडीं ।
टले सख़त पहर करे बख़त वहर ।सोहना सेहन सुजीदे पैर धरे ।
आ आंगन फ़रीद दे यार मिट्ठल ।सारी उम्मर गई ज़ूख जुखदी ढल ।
कर लुतफ़ मेहर बट्ठ ज़ुलम कहर ।दिल डुक्खड़ी ठड्डड़े साह भरे ।

44. बिन यार सांवल ब्यू को नहीं

बिन यार सांवल ब्यू को नहीं ।हज़ा जनूनुल-आशकीन ।
बे ओ न आंसत व न ईं ।हज़ा जनूनल-आशकीन ।
थल बर तती रुलदी है क्युं ।सिध वाट तूं भुलदी है क्युं ।
यार असत हमदम हमनशीन ।हज़ा जनूनल-आशकीन ।
क्या नार क्या गुलज़ार वे ।क्या यार क्या अग़यार वे ।
यो रा बदान ओ रा बबीन ।हज़ा जनूनल-आशकीन ।
मज़हब वज्जूदी फ़रज़ है ।ब्युकल अज़ाई गरज़ है ।
दीदेम बा चशमे यकीन ।हज़ा जनूनल-आशकीन ।
डेंह हिजर दे मोकला गए ।वेल्हे वसाल दे आ गए ।
जानम बजानां शुद करीं ।हज़ा जनूनल-आशकीन ।
नहीं काल बेशक हाल है ।पल पल असाडे नाल है ।
नाज़क मज़ाज नाज़नीन ।हज़ा जनूनल-आशकीन ।
वाह इशक डित्तड़ी डात है। थई रात सभ परभात है ।
शुद फ़रश दिल अरश बरीं ।हज़ा जनूनल-आशकीन ।
ख़लकत कूं जैंदी गोला है ।हरदम फ़रीद दे कोल है ।
सौरीद पीर फ़खरु दीन ।हज़ा जनूनल-आशकीन ।

45. बिरहों प्यु से पख़ड़े

बिरहों प्यु से पख़ड़े ।बेकल धन्दड़े चुकड़े ।
पीत परम दी चाशनी चखड़ेम ।विसरे डुक्खड़े पुखड़े ।
इशक दी बात न समझन असलों ए मुलवाने रुखड़े ।
अदनबी रब्बी जब होया ।शरा मसायल मुक्कड़े ।
'हमा ओसत' दा सबक घिदोसे ।फ़ाश थए गुझ्झ लुक्कड़े ।
हीं राहों न फिरसां तोड़ीं ।सर थीसम सौ टुक्कड़े ।
महज फ़रीद नहीं कई हाजत ।हउं हिक्क नेंह दे बुखड़े ।

46. बूला बनेसर किस नूं पावां

बूला बनेसर किस नूं पावां ।ढोलन कीतम ना मनज़ूर ।
कथ नूं बेनां मांग बणावां ।कजला पावां सुरखी लावां ।
यार तती दा वसदा दूर ।
प्रीत पुरानी कमला कीता ।इशक अवलड़ा लूं लूं सीता ।
पवन कुललड़े पल पल पूर ।
तरज़ न्याज़ असाडी मोड़ी ।किबला कदमी यार दी धूड़ी ।
हुसन अज़ल दी चाल ग़रूर ।
सेंगियां सुरतियां सेंझ वछावन ।बांह चुड़ेली वर गल लावन ।
हक मैं मुफत रही महजूर ।
वादी ऐमन थल दे चारे ।जिथां बरोचल कर हूं कतारे ।
ककड़े बनड़े हुन कोह तूर ।
मुलां मारन, सखत सतावन ।गुझड़े राज़ दा भेत न पावन ।
बे वस शोदे हन मअज़ूर ।
मलवाने दे वाअज़ न भाने ।बेशक साडा दीन ईमाने ।
इबनुलअरबी दी दसतूर ।
आशक मसत मदाम मलामी ।कह सुबहानी बण बसतामी ।
आख अनल्लहक थी मनसूर ।
हुसन परसती ऐन इबादत ।शाहद मसती सरफ सआदत ।
गीबत गफलत महज़ हज़ूर ।
रीत फ़रीद दी पुठड़ी सारी ।रहन्दा सौम व सलवातों आरी ।
रिन्दी मशरब है मशहूर ।

47. चूड़ा अनाडे जैसलमेर दा

चूड़ा अनाडे जैसलमेर दा ।सूहा रंगाडे ख़ास अजमेर दा ।
होवे असली ख़ास मड़ीचा ।ना नकली वल फेर दा ।
जलदी आवे ना चिर लावे ।कंम नहीं अथ देर दा ।
बिरहों दा चूड़ा परीत दा सूहा ।काक नदी दे घेर दा ।
बिछूआ बीकानेरी घिनसां ।सजड़े खबड़ै पैर दा ।
सहजे पीसां पा ठमकीसां ।थोरा चीसां डेर दा ।
यार फ़रीद मनेंदम आखीए ।क्या ग़म पए दे वैर दा ।

(अनाडे=मंगवा दे, सूहा=लाल,व्याह दा जोड़ा, मड़ीचा=
मारवाड़ी, वल=झूठा,फरेब, अथ=इत्थे, काक=इक नदी,
घेर=घेरा,साट, बिछूआ=पैर दी उंगली दा गहणा, घिनसां=
लवांगी, पीसां=पहनांगी, ठमकीसां=ठुमक ठुमक चलांगी, थोरा=
अहसान, डेर=देवर, मनेंदम=मेरी मन्नदा है, पए=दूजे)

48. चूड़े बीड़े किढें पांवां ड़ी पावां

चूड़े बीड़े किढें पांवां ड़ी पावां ।मैडा यार ग्या मल्हेर ते ।
डे कर कूड़ियां आस उम्मीदां ।थोरे चाढ़ डुक्खावां ड़ी डुक्खावां ।
है डुक्खड़े दिल दिलगीर ते ।
गए बरबाद लक्खो लक्ख वाअदे ।हुन क्युं फटकी ख़ावां ड़ी खावां ।
खोटे तों वैरी बे पीर ते ।
रात हिजर दी रत्तड़ों रोवां ।रत्तड़ियां मरचां लावां ड़ी लावां ।
तत्ती सौ मन हिक्क हिक्क चीर ते ।
सलदे सकदे ओल्हे घोल्हे ।वारी वारी जावां ड़ी जावां ।
मिट्ठी कासद दी तकरीर ते ।
यार न आवे कुझ्झ न भावे ।भैणीं नूं नित्त तांवां ड़ी तांवां ।
थीवां कावड़ मां प्यु वीर ते ।
खेड़ीं भैड़ीं दे हत्थ आई ।जैं डेंह लद्धियां लांवां ड़ी लांवां ।
डोड़ी तरेउड़ी सख़ती हीर ते ।
औखीं सौखी मूल न फिरसां ।क्युं नेंह फ़रीद लजांवां ड़ी लजांवां ।
मुट्ठी कुल कम रक्ख तकदीर ते ।

49. चोरीयों जारीयों इसतग़फार

(अरदास)
चोरीयों जारीयों इसतग़फार ।बखशिम शाला रब्ब गुफार ।
गन्दड़ी आदत गन्दड़े फेअलों ।तोबा ! तोबा !! लख लख वार ।
कर कर सखत गुनाह परतापुइम ।तूं हैं खावन्द बखशन हार ।
पीर पैगम्बर तैडे बाहीं ।तूं मालक तूं कुल मुखतार ।
मैं बद अमली ते कर रहमत ।जैं डेंह यार वी यार न यार ।
औगन हारी ना केहें कंम दी ।कोझी कमली बद किरदार ।
तैडा शान है फज़ल करम दा ।मैं विच डोह ते ऐब हज़ार ।
आवन याद गुनाह पुराने ।पिट पिट रोवां ज़ारो ज़ार ।
रात कबर दी डेंह हशर दा ।सिर ते कड़कम बारे बार ।
मैं मसकीन फरीद हां तैडा ।तौं बिन कौन उतारिम पार ।

50. दम मसत कलन्दर मसत कलन्दर

दम मसत कलन्दर मसत कलन्दर ।मसत व मसती अलसती ।
नफ़स मुकद्दस अहल शआदत ।इलम अमल विच्च रखन सआदत ।
छड्ड कर विरद ते ज़ुहद इबादत ।नित्त करदे विरद परसती ।
साफ़ मब्बरा ग़ैर ख़्यालों ।पाक अयालों आलों मालों ।
रासख वजदों ज़ौको हालों ।वह वह मसतींदी मसती ।
अज़ल अबद तक जानड़न वाकफ़ ।लानत रहमत समझन आरफ़ ।
बूझन मकाशफ महज मरादफ ।क्या बालाई क्या पसती ।
जे तूं चाहें कुरब हकीकी ।विरसा अलवी ते सदीकी ।
रीत जुनेदी रसम शकीकी ।भट्ट हसती वट्ट हसती ।
सट्ट सुहबत रख खलवत अज़लत ।मौत इरादी तूं पा नज़हत ।
जे सर डेसीं हई बे शुबहत ।अथ सौदा दसत बदसती ।
सोज़ परीता हाल फ़रीदी ।मज़हब मिल्लत हिस तौहीदी ।
मैल कुचैला शकल जरीदी ।ख़ुश वस्सदा परम दी वसती ।

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