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अज्ञेय
Agyeya
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Ityalam Agyeya

इत्यलम् अज्ञेय

अकाल-घन
चलो, चलें!
विशाल जीवन
वन-पारावत
कीर
द चाइल्ड इज द फ़ादर आफ़ द मैन
ध्रुव
सूर्यास्त
बद्ध
जीवन-दान
बंदी और विश्व
उषा के समय
प्रेरणा
अंतिम आलोक
तंद्रा में अनुभूति
घृणा का गान
बंदी-गृह की खिड़की
अचरज
प्राण तुम्हारी पद-रज फूली
कीर की पुकार
स्मृति
राखी
मत माँग
गा दो
दिवाकर के प्रति दीप
विश्वास
धूल भरा दिन
अतीत की पुकार
मैं वह धनु हूँ
निमीलन
विपर्यास
ताजमहल की छाया में
प्रार्थना
अखंड ज्योति
गोप गीत
नाम तेरा
मैं तुम्हारे ध्यान में हूँ!
विधाता वाम होता है
आज थका हिय हारिल मेरा!
एक चित्र
चिंतामय
द्वितीया
रहस्यवाद
ओ मेरे दिल!
निवेदन
मैंने आहुति बन कर देखा
रक्तस्नात वह मेरा साकी
पार्क की बेंच
आह्वान
दूरवासी मीत मेरे
उड़ चल हारिल
रजनीगंधा मेरा मानस
सावन-मेघ
उषा काल की भव्य शांति
निरालोक
क्षण भर सम्मोहन छा जावे!
शिशिर की राका-निशा
वर्ग-भावना-सटीक
ऋतुराज
रात होते, प्रात होते
मिट्टी ही ईहा है!
जब-जब पीड़ा मन में उमँगी
जैसे तुझे स्वीकार हो
चार का गजर
भादों की उमस
चेहरा उदास
चरण पर धर चरण
मुक्त है आकाश
किस ने देखा चाँद
मेरी थकी हुई आँखों को
आज मैं पहचानता हूँ
कृत-बोध
बदली की साँझ
आशी:
वीर-बहू
कल की निशि
प्रिया के हित गीत
देख क्षितिज पर भरा चाँद
प्रतीक्षा
एक दर्शन
हिमंती बयार
नन्ही शिखा
माघ-फागुन-चैत
जागर
शाली
आषाढ़स्य प्रथम दिवसे
पानी बरसा
किसने देखा चाँद
 
 
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