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गोपाल सिंह नेपाली
Gopal Singh Nepali
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गोपाल सिंह नेपाली

गोपाल सिंह नेपाली (11 अगस्त 1911-17 अप्रैल 1963) का जन्म बिहार के पश्चिमी चम्पारन के बेतिया में हुआ था। उनका मूल नाम गोपाल बहादुर सिंह था । वे हिन्दी एवं नेपाली के प्रसिद्ध कवि थे। उन्होंने हिन्दी फिल्मों के लिये गाने भी लिखे। वे एक पत्रकार भी थे जिन्होने "रतलाम टाइम्स", चित्रपट, सुधा, एवं योगी पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। 1933 में उनका पहला काव्य संग्रह ‘उमंग’ प्रकाशित हुआ था। ‘पंछी’ ‘रागिनी’ ‘पंचमी’ ‘नवीन’ और ‘हिमालय ने पुकारा’ इनके काव्य और गीत संग्रह हैं। नेपाली ने देश-प्रेम, प्रकृति-प्रेम तथा मानवीय भावनाओं का सुंदर चित्रण किया है। उन्हें "गीतों का राजकुमार" कहा जाता था। नेपाली ने तकरीबन चार द र्जन फिल्मों के लिए गीत भी रचा था। उन्होंने ‘हिमालय फिल्म्स’ और ‘नेपाली पिक्चर्स’ की स्थापना की थी। निर्माता-निर्देशक के तौर पर नेपाली ने तीन फीचर फिल्मों-नजराना, सनसनी और खुशबू का निर्माण भी किया था।

गोपाल सिंह नेपाली हिन्दी कविता

हिंदी है भारत की बोली
इस रिमझिम में चाँद हँसा है
मेरा देश बड़ा गर्वीला
वसंत गीत
बाबुल तुम बगिया के तरुवर
दीपक जलता रहा रातभर
हिमालय और हम
युगांतर
स्‍वतंत्रता का दीपक
तुम आग पर चलो
वो हैं बंद लिफाफा पर हम तो खुली किताब हैं मौला
सुनो
लघु सरिता
शासन चलता तलवार से
हिमालय ने पुकारा
रुबाई
मैं विद्युत् में तुम्हें निहारूँ
आ रहे तुम बनकर मधुमास
नई उमरिया प्यासी है
भाई-बहन
नवीन कल्पना करो
उस पार
यह दिया बुझे नहीं
प्रार्थना बनी रही
गरीब का सलाम ले
मेरा धन है स्वाधीन क़लम
मेरी दुल्‍हन सी रातों को
अपनेपन का मतवाला
मुसकुराती रही कामना
कुछ ऐसा खेल रचो साथी
दो प्राण मिले
दूर जाकर न कोई बिसारा करे
मुक्तक
तू पढ़ती है मेरी पुस्तक
तारे चमके, तुम भी चमको
मैं प्यासा भृंग जनम भर का
कवि की बरसगाँठ
चौपाटी का सूर्यास्त
यह दिल खोल तुम्हारा हँसना
पीपल
होली

Gopal Singh Nepali Hindi Poetry/Shayari

Hindi Hai Bharat Ki Boli
Is Rimjhim Mein Chand Hansa
Mera Desh Bada Garveela
Vasant Geet
Babul Tum Bagiya Ke Taruvar
Deepak Jalta Raha Raat Bhar
Himalaya Aur Ham
Yugantar
Swatantarta Ka Deepak
Tum Aag Par Chalo
Vo Hain Band Lifafa Par
Suno
Laghu Sarita
Shasan Chalta Talvar Se
Himalaya Ne Pukara
Rubai
Main Vidyut Mein Tumhen Niharun
Aa Rahe Tum Bankar Madhumas
Nai Umariya Pyasi Hai
Bhai-Bahan
Naveen Kalpana Karo
Us Paar
Yeh Diya Bujhe Nahin
Prarthana Bani Rahi
Gareeb Ka Salam Le
Mera Dhan Hai Swadhin Qalam
Meri Dulhan Si Raaton Ko
Apnepan Ka Matwala
Muskurati Rahi Kaamna
Kuchh Aisa Khel Racho Sathi
Do Pran Mile
Door Jakar Na Koi Bisara Kare
Muktak
Tu Padhti Meri Pustak
Tare Chamke Tum Bhi Chamko
Main Pyasa Bhring Janam Bhar Ka
Kavi Ki Barasganth
Chaupati Ka Suryasat
Yeh Dil Khol Tumhara Hasna
Peepal
Holi