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घासीराम
Ghasiram
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Ghasiram

घासीराम हिन्दी कविता

रंग में रंग दई बांह पकर के
कान्हा पिचकारी मत मार
फाग खेलन बरसाने आये हैं
श्यामा श्याम सलोनी सूरत को सिंगार बसंती है
कारे कजरारे सटकारे घुँघवारे प्यारे