Hindi Kavita
अज्ञेय
Agyeya
 Hindi Kavita 

Bawara Aheri Agyeya

बावरा अहेरी अज्ञेय

जनवरी छब्बीस
घास-फूस धैर्य का
खद्योत दर्शन
तारा दर्शन
काँगड़े की छोरियाँ
तुम फिर आ गए, क्वाँर?
चाँदनी जी लो
झरने के लिए
उगा तारा
वह नाम
वहाँ रात
प्रथम किरण
हवाई यात्रा
हवाएँ चैत की
शरद की साँझ के पंछी
मालाबार का एक दृश्य
वेदना की कोर
बावरा अहेरी
वर्षांत
दफ़्तर
जाता हूँ सोने
संध्या तारा
तड़िदर्शन
विज्ञप्ति
सवेरे-सवेरे तुम्हारा नाम
नख शिख
शोषक भैया
अंधड़
आज तुम शब्द न दो
यह दीप अकेला
उषा दर्शन
जो कहा नहीं गया
देह-वल्ली
ये मेघ साहसिक सैलानी
नदी के द्वीप
 
 
 Hindi Kavita