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गोपालदास नीरज
Gopal Das Neeraj
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बादर बरस गयो गोपालदास नीरज

नहीं मिला
नींद भी मेरे नयन की
दिया जलता रहा
पिया दूर है न पास है
मुहूरत निकल जायेगा
बहार आई
कितने दिन चलेगा
मरण-त्यौहार
कफ़न है आसमान
क्यों मन आज उदास है
आ गई थी याद तब
सूनी-सूनी साँस की सितार पर
व्यंग्य यह निष्ठुर समय का
बन्द कूलों में
गीत-अब तुम्हारा प्यार भी
प्यार सिखाना व्यर्थ है
खेल यह जीवन-मरण का
रुके न जब तक साँस
मुस्कुराकर चल मुसाफिर
मेरा इतिहास नहीं है
मैं तूफ़ानों में
यह संभव नहीं है
नयन तुम्हारे
ऐसे भी क्षण आते
इतना तो बतलाते
तेरी भारी हार
पराजय भी फिर जय है
धर्म है
फूल हो जो
कल का करो न ध्यान
गीत-अब बुलाऊँ भी तुम्हें
आज मेरी गोद में
अभी न जाओ प्राण
मगर निठुर न तुम रुके
नारी
यदि मैं होता घन सावन का
अंतिम बूँद
क्या यही है प्रेम का प्रतिकार?
भूल जाना
बन्द करो मधु की
निभाना ही कठिन है
तब याद किसी की
प्यार नहीं मिलता है
मैं तुम्हें अपना
अब न आउँगा
अब तुम रूठो
 
 
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