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अज्ञेय
Agyeya
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Ari O Karuna Prabhamaya Agyeya

अरी ओ करुणा प्रभामय अज्ञेय

हे अमिताभ
धरा-व्योम
सोन-मछली
दीप पत्थर का
हम कृती नहीं हैं
सुख-क्षण
चाँदनी चुप-चाप
सपने का सच
प्याला : सतहें
ब्राह्म मुर्हूत : स्वस्तिवाचन
एक प्रश्न
मोह-बंध
चेहरे असंख्य : आँखें असंख्य
हरा-भरा है देश
शब्द और सत्य
पगली आलोक-किरण
जागरण-क्षण
तू-मैं
रात कटी
पहेली
अपलक रूप निहारूँ
रात भर आते रहे सपने
कवि कर्म
रूप-केकी
रात और दिन
औद्योगिक बस्ती
लौटे यात्री का वक्तव्य
सांध्य तारा
सागर पर भोर
मैं ने कहा, पेड़
सागर पर साँझ
मानव अकेला
सागर-तट : सांध्य तारा
हवाई अड्डे पर विदा
मैंने देखा एक बूँद
जन्म-दिवस
प्राप्ति
चिड़िया की कहानी
वसंत
धूप
न दो प्यार
पगडंडी
यह मुकुर
सागर-चित्र
नया कवि
नए कवि से
यह कली
रोपयित्री
बड़ी लम्बी राह
इशारे जिंदगी के
नए कवि : आत्मोपदेश
बाँगर और खादर
वहाँ पर बच जाय जो
जीवन-छाया
मछलियाँ
उन्मत्त
जब-जब
हिरोशिमा
रश्मि-बाण
टेर रहा सागर
चिड़िया ने ही कहा
सरस्वती-पुत्र
पास और दूर
झील का किनारा
अंतरंग चेहरा
अच्छा खंडित सत्य
 
 
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