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महादेवी वर्मा
Mahadevi Verma
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Agnirekha Mahadevi Verma

अग्निरेखा महादेवी वर्मा

अग्नि-स्तवन
अश्रु यह पानी नहीं है
आलोक पर्व-दीप माटी का हमारा
आँखों में अंजन-सा आँजो मत अंधकार (गीत)
ओ विषपायी
कहाँ उग आया है तू हे बीज अकेला
किस तरंग ने इसे छू लिया
क्यों पाषाणी नगर बसाते हो जीवन में
चातकी हूँ मैं
टकरायेगा नहीं
तुम तो हारे नहीं तुम्हारा मन क्यों हारा है
दिया-धूलि के जिन लघु कणों में
दीपक अब रजनी जाती रे (गीत)
दु:ख आया अतिथि द्वार (गीत)
नभ आज मनाता तिमिर-पर्व-आलोक-छंद
न रथ-चक्र घूमे
नहीं हलाहल शेष, तरल ज्वाला से
पूछो न प्रात की बात आज (गीत)
बंग-वंदना
बापू को प्रणाम-पूज्य बापू को श्रद्धांजलि
बाँच ली मैंने व्यथा की बिन लिखी पाती नयन में (गीत)
रात के इस सघन अँधेरे से जूझता (गीत)
वंशी में क्या अब पाञ्चजन्य गाता है
विदा-वेला-कवीन्द रवींद्र के महाप्रस्थान पर
वीणावादिनि ! कस लिया आज क्या अग्नि-तार (गीत)
वेदना यह प्राण छंदस की सजल अक्षय कला है
व्यथा की रात
सृजन के विधाता! कहो आज कैसे (गीत)
हिमालय
 
 
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