Hindi Kavita
गोपालदास नीरज
Gopal Das Neeraj
 Hindi Kavita 

आसावरी गोपालदास नीरज

दीप और मनुष्य
हर दर्पन तेरा दर्पन है
अधिकार सबका है बराबर
यदि वाणी भी मिल जाए दर्पण को
ओ प्यासे अधरोंवाली
कोई मोती गूँथ सुहागिन
विदा-क्षण आ पहुंचा
बसंत की रात
प्यार न होगा
दूर नहीं हो
पाती तक न पठाई
धनियों के तो धन हैं लाखों
स्वप्न झरे फूल से
हम सब खिलौने हैं
ओ प्यासे
स्नेह सदा जलता है
बुलबुल और गुलाब
अस्पृश्या
दुख के दिन
मुझे तुम भूल जाना
 
 
 Hindi Kavita