पंकज पुण्डीर
Pankaj Pundir
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Hindi Poetry Pankaj Pundir

पंकज पुण्डीर

पंकज पुण्डीर का जन्म शामली उत्तर प्रदेश में हुआ ।

1. कल्पना

जब भी कभी मैं सोचता हूँ,
देखता हूँ स्वयं को सोचते हुए ॥

उल्लास भरे मन से, स्वप्न भरी आँखों से।
विश्वास भरे हृदय से, उत्साह भरे हाथों से ॥

जब भी कभी मैं सोचता हूँ ।
देखता हूँ स्वयं को सोचते हुए ॥

तुम आज, साक्षात स्वयं की कल्पना हो ॥

उत्तर हो उन प्रश्नों के, जो मन पृष्ठ पर अंकित हैं ।
विवरण हो उस परिभाषा का, जो ज्ञानवृक्ष से मुखरित हैं ।
ताप हो अविरत दिनकर का, जो हृदयव्योम में पुलकित है ॥

निश्चित है, तुम आज, साक्षात स्वयं की कल्पना हो ॥

संगीत के सप्तस्वर तुम हो, प्रेम के वंशीधर तुम हो ।
स्वः भावों का मान तुम हो, संकल्पों का अभिमान तुम हो ।
सीमाओं का ज्ञान तुम हो, प्रज्ञाओं का विज्ञान तुम हो ।

निश्चित है, तुम आज, साक्षात स्वयं की कल्पना हो ॥

2. उदासी

शब्द जिसमें कोई ध्वनि नहीं
मौन बस एक साथी
अंतस में उठते निरुत्तर प्रश्न
धीमी पलकें, आँखें खुली पर अचेतन
अप्रसन्नता कुछ सृष्टा से, थोड़ी स्वयं से
परिवर्तन अल्पइच्छित, अवस्था अत्याज्य
विचार केंद्रित, आकृति स्थिर, चित्रण उदासी।।


 
 
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