मोहित नेगी मुंतज़िर
Mohit Negi Muntazir
 

मोहित नेगी मुंतज़िर

मोहित नेगी मुंतज़िर (12 नवम्बर 1995) का जन्म उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग ज़िले के सौंराखाल गांव में हुआ। इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सौंराखाल तथा टिहरी गढ़वाल से प्राप्त की।इन्होंने श्रीनगर गढ़वाल से सिविल इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की। कॉलेज के दिनों में इन्हें कविता तथा अभिनय का शौक़ लगा। जिसके कारण विभिन्न नाटकों तथा रामलीला में अभिनय करने लगे, धीरे-धीरे गढ़वाली फिल्मों में हाथ आज़माया तथा तक़रीबन 4 गढ़वाली फिल्मों तथा अनेकों एल्बमों में अभिनय किया। "सूबेदार साब का नौना" इनकी प्रसिद्ध फिल्म है। यह हिन्दी तथा गढ़वाली दोनों भाषाओं के कवि सम्मेलनों में कॉलेज के दिनों से ही शिरकत करने लगे थे। इनकी रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। अक्षरम, किसलय इनके दो साझा कविता संग्रह हैं। इनको विभिन्न साहित्यिक संस्थानों ने सम्मानित भी किया है, जिनमें पर्पल पेन साहित्यिक समूह द्वारा प्रदत्त 'साहित्य केतु सम्मान' प्रमुख है। वर्तमान में यह उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग में मानचित्रकार (सिविल इजी०) के पद पर कार्यरत हैं।

हिन्दी कविता मोहित नेगी मुंतज़िर

भोर आ जाओ गगन में
सुनो संगी चमन वीरों
जिनको तू अपना कहता है
कितनी ही मेहनत करके
परम पुनीता इस धरा पर देवसरिता
जब हमें तुम याद आये
साथ में जी लूं
जिनके ज़ुल्मों को हम सह गए
बूढ़ी सांसें चल रही थीं
अंजान साए पीछे
 
 
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