गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'
Gayaprasad Shukla Sanehi
 

गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही'

गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' (1883-1972) हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल के द्विवेदी युगीन साहित्यकार हैं। इन्होंने 'सनेही' उपनाम से कोमल भावनाओं की कविताएँ, 'त्रिशूल' उपनाम से राष्ट्रीय कविताएँ तथा 'तरंगी' एवं 'अलमस्त' उपनाम से हास्य-व्यंग्य की कविताएँ लिखीं। इनकी देशभक्ति तथा जन-जागरण से सम्बद्ध कविताएँ अत्यधिक प्रसिद्ध रही हैं।


गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' हिन्दी कविता

असहयोग कर दो
किसान
कोयल
ग्रीष्म स्वर्णकार बना
घूमें घनश्याम स्यामा
दर्पण में हिय के वह मूरति
नारी गही बैद सोऊ बेनि
परतंत्रता की गाँठ
प्रभात किरण
पावन प्रतिज्ञा
बदरिया
बुझा हुआ दीपक
बौरे बन बागन विहंग विचरत बौरे
भक्त की अभिलाषा
भारत संतान
मज़दूरों का गीत
राष्ट्रीयता
वह हृदय नहीं है पत्थर है
शैदाए वतन
संकित हिये सों पिय अंकित सन्देशो बांच्यो
सागर के उस पार
साम्यवाद
सुभाषचन्द्र
सूर है न चन्द है
हमारा प्यारा हिन्दुस्तान
 
 
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