अजय शोभने
Ajay Shobhane
 

अजय शोभने

अजय कुमार शोभने (01, जनवरी,1950-) का जन्म श्रीमती ललिता और श्री हरनारायण पटेल के घर मध्यप्रदेश- दतिया जिले के ग्राम सड़वारा में हुआ। इन्होंने एम.ए. तथा एल.एल-बी की शिक्षा प्राप्त की । आप मध्य प्रदेश शासन के राजस्व विभाग में तहसीलदार पद से सन् 2009 में सेवानिवृत्त हुए । गौतम बुद्ध तथा उनके विचारों ने इन्हें काफी प्रभावित किया सेवानिवृत्त होने के पश्चात इन्होंने उनके विचारों को कविताओं के माध्यम से जनसाधारण तक पहुंचाने का प्रण किया । आप मासिक पत्रिका प्रवाह भारत के संपादक हैं । काव्य-संग्रह 'अंतर्मन के मोती' इनकी पहली पुस्तक है । जिसमें गौतम बुद्ध, बाबा साहब, नारी, ओज, प्रकृति प्रेम, विविध विषयों पर 80 कविताएँ हैं, जिनको वह अंतर्मन के मोती मानते हैं, वर्तमान में 34 विवेकानंद नगर करोंद भोपाल में निवासरत है और समाज सेवा, विपस्सना विशोधन आचार्य-शिष्य परम्परा के वाहक एवं कृषि कार्य में अपना जीवन-व्यतीत कर रहे हैं ।

हिन्दी कविता अजय शोभने

मेरे पथ के बोधि दीप
संध्या की इस गोधूली में
सावित्रीबाई फुले
जीवन में मधुसम प्रेम घोल
तुम्हें कुदरत ने इंसान बनाया
जिसके चरण-चरण
मरे-मरे से तुम जीते हो
एक अबोध बच्ची
सागर में मोती भरे-पड़े हैं
तुम कहोगे यही ?
 
 
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